राहु-कालम : शुभ कार्यो में विशेष रुप से त्याज्य (Rahu Kalam: Aboondoned for Auspicious Events)
देखा जाये तो समय के दो पहलू है. एक अच्छा ओर एक बुरा. पहले प्रकार का समय व्यक्ति को ठिक समय पर काम करने के लिये प्रेरित करता है. तो दूसरा समय उस काम को किस समय करना चाहिए इसका भान कराता है. (The first phase acts as a guide while in the second phase even the seconds are considered to determine the position of Moon or to obtain the period of Rahu Kaal.) पहला समय एक मार्गदर्शक की तरह काम करता है. तो दूसरे प्रकार के समय में सेंकेडों का भी ध्यान रखते हुये कभी चन्द्रमा की दशाओं का तो कभी राहु काल का ज्ञान किया जाता है.
व्यवसाय या नौकरी में उन्नति -प्रमोशन (Your Promotion and astrology)
अधिकांश जातकों का प्रश्न होता है कि उन्हें व्यवसाय अथवा सर्विस में प्रमोशन कब मिलेगा? कुछ व्यक्तियों को अत्यधिक परिश्रम के बाद भी आशा के अनुरुप सफलता नहीं मिल पाती है और कुछ की थोडी सी मेहनत ही ऎसा रंग लाती है कि प्राप्त सफलता पर उसे स्वयं विश्वास नहीं होता है....होटल प्रबन्धन में सफलता के लिये ज्योतिष योग (Astrology & Success in Hotel Management)
होटल प्रबन्धन एक आकर्षक कैरियर है. यदि आप होटल प्रबन्धन के क्षेत्र में अपना कैरियर बनाना चाहते हैं तो देखिये कि कौन से ज्योतिष योग आपको इस व्यवसाय अथवा इस क्षेत्र में सफलता दिला सकते हैं....साफ्टवेयर प्रोग्रामर कैरियर के लिये ज्योतिष योग (Astrology Yoga for Software Programmer Carrer)
शुक्र ग्रह को गणन (कम्प्यूटर) का कारक माना गया है. मंगल बिजली के व सिविल इंजिनियरिंग तथा भूमि के कारक है. बुध को शिल्प, तर्क, गणना करने की योग्यता देने वाला ग्रह कहा गया है. शनि से तकनीकी काम, व यन्त्रों के ग्रह कहे गये है. सूर्य की युति मंगल के साथ होने पर इंजिनियर बनने में सहायता मिलती है....राजनीति में प्रवेश एवं सफलता के लिये ज्योतिष योग (Astrology Yoga for Carrer in Politics)
अन्य व्यवसायों एवं कैरियर की भांति ही राजनीति में प्रवेश करने वालों की कुंडली में भी ज्योतिष योग होते हैं. राजनीति में सफल रहे व्यक्तियों की कुंडली में ग्रहों का विशिष्ट संयोग देखा गया है,...शनि के वाहन का साढ़ेसाती पर प्रभाव (Impact of Saturn’s Vahan on Sadesati)
शास्त्रो मे शनि के नौ वाहन कहे गये है. शनि की साढेसाती के दौरान शनि जिस वाहन पर सवार होकर (Sadesati gives results according to Saturn’s ride) व्यक्ति की कुण्डली मे प्रवेश करते है. उसी के अनुरुप शनि व्यक्ति को इस अवधि मे फल देते है. वाहन जानने के लिए निम्न विधि से शनि साढ़ेसाती के वाहन का निर्धारण करते हैं...आपके ग्रह आपका व्यवसाय (The planets & Your Business or Career)
ज्योतिष की ज्ञान गंगा बृहद जातक के अनुसार लग्न अथवा चन्द्र से दशम भाव में क्रमश: सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र अथवा शनि हों तो क्रमश: पिता, माता, शत्रु, मित्र, बडे भाई, पत्नी अथवा नौकरों के द्वारा आय की प्राप्ति होती है. ...फैशन विशेषज्ञ और ज्योतिष योग (Astrology Yoga for Fashion Designer Career)
आज वैभव व फैशन का युग है. आज का युग दिखावे का रह गया है. फैशन की दुनिया (Fashion Designer Career) युवाओं को विशेष रुप से लुभाती है. इसके मायाजाल से भला कौन और कब तक बचा है....प्रशासनिक अधिकारी बनने के लिये ज्योतिष योग (Astrology Yoga for Administrative Officer Carrer)
कुण्डली में बनने वाले योग ही बताते है कि व्यक्ति की आजीविका का क्षेत्र क्या रहेगा. प्रशासनिक सेवाओं में प्रवेश की लालसा अधिकांश लोगों में रहती है. आईये देखें कि कौन से योग प्रशासनिक अधिकारी के कैरियर में आपको सफलता दिला सकते हैं....शुभ और अशुभ भकूट (Auspicious Bhakoot & malefic Bhakoot in Marriage Compatibility)
ज्योतिष के अनुसार वर और कन्या की कुण्डली मिलायी जाती है। कुण्डली मिलान से पता चलता है कि वर कन्या की कुण्डली मे कितने गुण मिलते हैं, कुल 36 गुणों में से 18 से अधिक गुण मिलने पर यह आशा की जाती है कि वर वधू का जीवन खुशहाल और प्रेमपूर्ण रहेगा. ...पंच-पक्षी ज्योतिष पद्वति (Pancha-Pakshi Shastra Astrology System)
तमिलनाडु में प्रचलित पंच-पक्षी ज्योतिष पद्वति (Panch-pakshi Shastram) अपने आप में अनेक पद्वतियों की विशेषताओं को अपने में समाहित किये हुये है. इस विधि के अन्तर्गत फल जानने के लिये बडी - बडी गणनाएं नहीं निकालनी पडती बल्कि सरलता से जन्म पक्षी निर्धारित कर अपनी जिज्ञासा का समाधान प्राप्त किया जा सकता है. ...शनि का कन्या राशि मे प्रवेश: मिथुन राशि के कंटक शनि (Saturn's Transit into Virgo: Kantak Shani for Gemini)
10 सितम्बर से शनि कन्या मे आ चुके है. इस घर मे शनि के आने से मिथुन राशि वालो की लघु कल्याणी ढैय्या शुरु हो जायेगी (Kantak Shani transit will commence for Gemini from 10 September). शनि की लघु कल्याणी ढैय्या को कंटक शनि (Kantak Shani) के नाम से भी जाना जाता है....तुला राशि के लिए शनि का कन्या प्रवेश (How will the transit of Saturn into Virgo impact Libra)
शनि के 10 सितम्बर को कन्या राशि मे आते ही तुला राशि के लिए शनि की साढेसाती आरम्भ हो गई है (When Saturn enters Virgo on 10th September, Sadesati will start for Libra Moonsign). शनि एक राशि मे ढाई साल रह्ते है. इस ढाई साल मे शनि तुला राशि से बारहवे घर मे रहेगे (Saturn will be in the 12th house from Libra for 2 1/2 years). कन्या राशि बुध की राशि है. बुध तथा शनि मे मित्रता के संबध है....आर्थिक घाटे का एक कारण पंचम शनि (Pancham Shani Causes Financial Losses)
शनि की साढेसाती (Shani Sade Sati) व ढैया (Shani Dhaiya) के आर्थिक मामलों के लिए अच्छा नही समझा जाता है. इसके अतिरिक्त शनि की एक और स्थिति है जो आर्थिक स्थिति के सबसे अधिक प्रभावित करती है. जिसे पंचम शनि (Pancham Shani) के नाम से जाना जाता है....शनि का कन्या राशि मे प्रवेश : सिंह राशि के लिए फल विचार (Transit of Saturn into Virgo and Leo Moonsign)
कन्या राशि मे शनि के प्रवेश के साथ ही सिंह राशि के जातको के लिए साढेसाती का तीसरा चरण आरम्भ होता है (The third phase of Sadhe sati wil start for Leo Moonsign on 10th September). कन्या राशि का स्वामी बुध ग्रह शनि का मित्र है (Lord of Virgo Mercury is a friend of Saturn). शनि इस समय सिंह राशि से दूसरे घर मे रहेगा. और कन्या राशि से वह अपनी तीसरी दृ्ष्टि से चौथे घर मे स्थित वृ्श्चिक राशि को देखेगा....शनि की साढेसाती : चन्द्र के अनुसार सहनशक्ति का मापन (Saturn's Transit: Endurance Test Through Moon)
जन्म राशि के शनि के निकट आने पर शनि की साढेसाती आरम्भ होती है. और जन्म राशि का अर्थ है कुण्डली की वह राशि जिसमे चन्द्र स्थित है (Janma Rashi is the sign in which Moon was placed at the time of birth). इसलिए जन्मागं मे चन्द्र की स्थिति शनि की साढेसाती की अवधि के शुभ फलों मे कमी या बढोतरी के पूरी तरह से प्रभावित करती है....शनि की साढेसाती : सोने से कुण्दन बनने के साढेसात साल (Saturn's Sadesati : 7 1/2 Years of Endurance Test)
शनि की महादशा व्यक्ति के संघर्ष व मेहनत की आग मे तपा कर सोने से कुण्दन बनाने के समान काम करती है. चन्द्र के ज्योतषि शास्त्र मे मन व मानसिक स्थिति का कारक कहा गया है (Moon is the karak for the heart and mental status as per Jyotish). तथा शनि के जन्मों का न्याय करके कष्ट देने वाला ग्रह कहा गया है....जैमिनी ज्योतिष से व्यवसायिक स्थिति (Analysing Business From Jaimini Astrology)
ज्योतिषशास्त्र ऐसा विज्ञान है जो भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों कालों को देखने की क्षमता रखता है.व्यक्ति के जीवन में होने वाली प्रत्येक घटनाओं के विषय में ज्योतिषशास्त्र (Jaimini Astrology) फलकथन करने की योग्यता रखता है.नौकरी हो अथवा व्यवसाय किस क्षेत्र में व्यक्ति को कैसी सफलता मिलेगी यह सब ज्योतिष से ज्ञात किया जा सकता है....ज्योतिष में अशुभ कालसर्पयोग (The Effect of Kalsarpa Yoga According to Astrology)
ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों की स्थिति से बनने वाले शुभ योग हैं तो कुछ अशुभ योग भी हैं.कालसर्प योग भी प्रमुख अशुभ योगों में से है..राहु केतु की स्थिति के अनुसार कालसर्प योग के कई प्रकार हैं.सभी कालसर्प योग अपने क्षेत्र विशेष में अशुभ परिणाम देते हैं।...कैरियर और कारकांश कुण्डली (Career & Karakamsh Kundali)
आज युवाओं के बीच सबसे अधिक चिंता का विषय आजीविका है.चिंता के इस विषय का समाधान ज्योतिष विधि से किया जाए तो मुश्किल काफी हद तक आसान हो सकती है.ज्योतिषशास्त्रियों के अनुसार हमारी कुण्डली में सब कुछ लिखा है बस उसे गहरी से जानने की आवश्यकता है.आइये जानें क्या कहती है कुण्डली कैरियर के बारे में....क्या है प्रश्न ज्योतिष (What is Prashna Astrology)
प्रश्न ज्योतिष, ज्योतिष कि वह कला है जिससे आप अपने मन की कार्यसिद्धि को जान सकते है. कोई घटना घटित होगी या नहीं, यह जानने के लिए प्रश्न लग्न देखा जाता है (The prashna lagna is considered to judge the results of a query)....लाल किताब एवं संतान योग
कुण्डली का पांचवा घर संतान भाव के रूप में विशेष रूप से जाना जाता है (The fifth house of the Lal Kitab stands for progeny). ज्योतिषशास्त्री इसी भाव से संतान कैसी होगी, एवं माता पिता से उनका किस प्रकार का सम्बन्ध होगा इसका आंकलन करते हैं....प्रश्न ज्योतिष में संतान योग (Santan Yogas In Prashna Astrology)
गृहस्थ जीवन की फुलवारी में बच्चे फूल के समान होते हैं. ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जब उचित योग बनता है जब संतान प्राप्ति की संभावनायें अधिक होतीं है....शनि का कन्या राशि मे प्रवेश : कितना शुभ कितना अशुभ (Saturn's Transit into Virgo)
शनि 10 सितम्बर 09 को अपनी राशि बदल रहे है. इस समय मे शनि कन्या राशि (Shani Gochar in Kanya Rashi) मे प्रवेश करेगे. तथा जिसके फलस्वरुप तुला राशि की साढेसाती (Shani Sade Sati for Tula Rashi) आरम्भ हो जायेगी. यह समय तुला राशि के व्यक्तियों के लिए भरपूर मेहनत कर लाभ पाने का रहेगा. तुला राशि मे चढती साढेसाती रहेगी. आने वाले पूरे पांच साल तुला राशि के लिए अच्छे रहेगे....गोचर शनि के शुभ फल: (Benefic Results of Saturn's Transits)
शनि कुण्डली के सभी ग्रहो मे सबसे अधिक मन्द गति से चलता है (Saturn is the slowest planet in the kundali in Vedic astrology). शनि एक ही राशि मे लगभग ढाई वर्ष रहता है. इसलिए सभी शुभ व महत्वपूर्ण घटनाऔ के घटित होने का समय निकालते समय शनि के गोचर पर विशेष ध्यान दिया जाता है. ...मांगलिक दोष का उपचार (Remedies of Manglik Dosha or Kuja Dosha)
मंगल की स्थिति से रोजी रोजगार एवं कारोबार मे उन्नति एवं प्रगति होती है तो दूसरी ओर इसकी उपस्थिति वैवाहिक जीवन के सुख बाधा डालती है. वैवाहिक जीवन में शनि को विशेष अमंलकारी माना गया है....प्रश्न कुण्डली से विवाह विचार (Marriage Analysis From The Horary Chart)
सोलह संस्कारों में विवाह को सर्वप्रमुख माना जाता है. विवाह के माध्यम से स्त्री और पुरूष का सम्बन्ध बनता है. यह सम्बन्ध दिखने में भले ही लौकिक लगता है लेकिन किसकी जोड़ी किससे बनेगी वह ईश्वर तय करता है. आपके लिए ईश्वर ने क्य तय कर रखा है जानना चाहेंगे, तो देखिये प्रश्न कुण्डली. ...प्रश्न कुण्डली से स्वास्थ्य लाभ (Health Analysis Through Prashna Kundali)
सभी व्यक्ति उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते है। लेकिन मानव शरीर मशीन के समान है इसलिए समय समय पर स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियां आती रहती हैं। स्वास्थ्य में जल्दी सुधार नहीं होने पर चिंता होती है।...बृहस्पति एवं शुक्र का दाम्पत्य जीवन पर प्रभाव (Impact of Jupiter & Venus on Married Life)
बृहस्पति और शुक्र दो ग्रह हैं जो पुरूष और स्त्री का प्रतिनिधित्व करते हैं.मुख्य रूप ये दो ग्रह वैवाहिक जीवन में सुख दु:ख, संयोग और वियोग का फल देते हैं. ...राहु महादशा में कालसर्प योग (Kalsarpa Yoga in Rahu Mahadasha)
काल सर्प योग को ज्योतिषशास्त्र में साढ़े साती की तरह महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है (The Kalsarpa Yoga is considered as malefic as the Sadesati).यह योग जिस व्यक्ति की कुण्डली में होता है वह राहु की दशा में आसमान की बुलंदियों को छूता है तो राहु की अशुभ दशा में दु:ख एवं कष्ट भोगता है....शकट योग का संकट (The Peril of Shakat Yoga)
जैसे कुण्डली मे उपस्थित शुभ योग के परिणामस्वरूप शुभ फल की प्राप्ति होती है उसी प्रकार कुण्डली में अशुभ योग होने पर व्यक्ति को उसका अशुभ परिणाम भी भोगना पड़ता है (Malefic yogas yield inauspicious results for the native).अशुभ योगों में से एक है "शकट योग" (Shakat yoga is a malefic yoga)....गोचर फल (Predictions for Transit of Planets)
सभी ग्रह चलायमान हैं.सभी ग्रहों की अपनी रफ्तार है कोई ग्रह तेज चलने वाला है तो कोई मंद गति से चलता है.ग्रहों की इसी गति को गोचर कहते हैं (The movement of planets through the zodiac is called transit).ग्रहों का गोचर ज्योतिषशास्त्र में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रखता है.ग्रहों के गोचर के आधार पर ही ज्योतिष विधि से फल का विश्लेषण किया जाता है....ज्योतिष में संतान योग (Progeny Related Combinations in Vedic Astrology)
गृहस्थ जीवन में संतान सुख की कामना सभी विवाहित स्त्री पुरूष करते हैं.संतान सुख आपको मिलेगा या नहीं यह सब आपकी कुण्डली में स्थित ग्रह निर्धारित करते हैं.किसी की कुण्डली में ग्रहों की ऐसी स्थिति होती है जो उन्हें कई संतानों का सुख देती है. देखिये क्या कहती है आपकी कुण्डली संतान प्राप्ति के संदर्भ में. ...लग्नस्थ ग्रहों का प्रभाव मीन लग्न में (Predictions for Planets Placed in Pisces Ascendant)
मीन लग्न का स्वामी गुरू होता है. इस लग्न में चन्द्र, मंगल और गुरू कारक ग्रह होते हैं. सूर्य, बुध, शुक्र एवं शनि इस लग्न में अकारक ग्रह बनकर मंदा फल देते हैं....कुम्भ लग्न में लग्नस्थ ग्रह (Planets placed in Aquarius ascendant)
कुम्भ लग्न का स्वामी शनि है. इस लग्न में सूर्य, शुक्र एवं शनि शुभ कारक ग्रह होते हैं. चन्द्रमा, मंगल, बुध एवं गुरू अशुभ और अकारक ग्रह होते हैं....मिथुन लग्न में नवग्रह का प्रभाव (Planets in Gemini Lagna)
राशि चक्र की तीसरी राशि मिथुन है.आपकी कुण्डली के लग्न भाव में यह राशि है तो आपका लग्न मिथुन कहलता है.आपके लग्न के साथ प्रथम भाव में जो भी ग्रह बैठता है वह आपके लग्न को प्रभावित करता है.आपके जीवन में जो कुछ भी हो रहा है वह कहीं लग्न में बैठे हुए ग्रहों का प्रभाव तो नहीं है।...कन्या लग्न में नवग्रहों का फल (Interpretation for placement of planets in Virgo Ascendant)
बुध कन्या राशि का स्वामी है. इस लग्न में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान, विवेकशील और व्यवसाय में निपुण होता है. इस लग्न में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वे कल्पनाशील और कोमल हृदय के होते हैं. इस लग्न में लग्नस्थ ग्रह का फल अलग अलग होता है जैसे...कर्क लग्न में नवग्रह (Navagraha In Cancer Lagna)
कर्क लग्न का स्वामी चन्द्रमा है.अगर आपका लग्न भी कर्क है तो आप घूमने के शौकीन होंगे.आपकी कल्पनाशीलता और स्मरण क्षमता अच्छी होगी.आप में निरन्तर प्रगति की ओर बढ़ने की इच्छा होगी.अगर आपकी कुण्डली के लग्न भाव में कोई ग्रह बैठा है तो इससे आप प्रभावित होंगे.ग्रहों का प्रभाव आपके लिए शुभ है या अशुभ जानिए....मकर लग्न की कुण्डली में लग्नस्थ ग्रह (Planets in Capricorn Ascendant)
मकर लग्न में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वे दुबले पतले होते हैं. समान्यतया इनकी शादी विलम्ब से होती है. इन्हें नियम और अनुशासन पर चलना पसंद होता है. ये थोड़े से जिद्दी और रूढ़िवादी होते हैं...धनु लग्न में लग्नस्थ ग्रहों का फल (Predictions for planets in Sagittarius)
धनु लग्न का स्वामी गुरू है (Jupiter is the lord of Sagittarius Rashi). इस लग्न में जिनका जन्म होता है वे मानवीय गुणों से परिपूर्ण होते हैं. ...वृश्चिक लग्न में लग्नस्थ ग्रह का फल (Placement of Planets in Scorpio Ascendant)
वृश्चिक लग्न का स्वामी मंगल है.सूर्य, चन्द्र, गुरू इस लग्न में कारक ग्रह होते हैं.मंगल भी लग्नेश होने से कारक होता है.अकारक ग्रह के रूप में बुध, शुक्र और शनि मंदा फल देते हैं.लग्न भाव में जब नवग्रह बैठते हैं तो यह किस प्रकार के व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करते हैं, एवं किस ग्रह का क्या फल होता है देखिए!...तुला लग्न में लग्नस्थ नवग्रह (The placement of planets in Libra)
तुला लग्न का स्वामी शुक्र है.इस लग्न में जन्म लेने वाले व्यक्ति दिखने में सुन्दर होते हैं.ये सत्यवादी और अनुशासनप्रिय होते हैं.इनमें परोपकारिता की भावना रहती है.गृहस्थ जीवन भी आमतौर पर खुशहाल होता है.इस लग्न में प्रथम भाव मे स्थित ग्रह के कारण अलग अलग व्यक्तियों को अलग अलग अनुभूति होती है....कुम्भ राशि के लिए वर्ष 2010 (2010 Horoscope Forecast for Kumbha Rashi)
पहली तिमाही- जनवरी से मार्च 2010साल के प्रथम माह में आपके जरूरी कार्य सम्पन्न होंगे. अनेक उपलब्धियां हासिल करने करने के अवसर मिलेंगे. नये सम्बन्धों ...मिथुन राशि के लिए वर्ष 2010 (2010 Horoscope Forecast for Mithuna Rashi)
पहली तिमाही- जनवरी से मार्च 2010जनवरी माह छात्रों के पक्ष में कम रहेगा जिसके कारण छात्रों का मन शिक्षा में कम लगेगा. इस अवधि में ...मीन राशि के लिए वर्ष 2010 (2010 Horoscope Forecast for Meena Rashi)
पहली तिमाही- जनवरी से मार्च 2010मेहनत व निष्ठा से अपने कामों को पूरा कर पायेंगे इससे उच्चाधिकारियों से प्रशंसा मिलेगी. इस माह आप जिस भी ...सिंह लग्न में नवग्रह का फल (The Navagarahas in Leo Ascendant)
जिस व्यक्ति का जन्म सिंह लग्न में होता है वे दिखने में सुन्दर और हृष्ट पुष्ट होते है.ये महत्वाकांक्षी और हठीले स्वभाव के होते हैं.ये जितने साहसी होते हैं उतने ही आत्मविश्वासी होते हैं.इनमें साहस और आत्म विश्वास भरपूर रहता है.राजनीति में इनकी रूचि रहती है.इस लग्न की कुण्डली मे प्रथम भाव में स्थित ग्रह किस प्रकार फल देते हैं इसे देखिए....मकर राशि के लिए वर्ष 2010 (2010 Horoscope Forecast for Makara Rashi)
पहली तिमाही- जनवरी से मार्च 2010 वर्ष के प्रथम माह में आपनी कार्यक्षमता में कमी महसूस कर सकते हैं. शत्रु पक्ष इन दिनों प्रभावी रहेंगे. ...वृश्चिक राशि के लिए वर्ष 2010 (2010 Horoscope Forecast for Vrishchika Rashi)
पहली तिमाही: जनवरी से मार्च 2010पहली तिमाही के प्रथम माह में आपका आत्मविश्वास बढे़गा. विरोधियों से किसी समझौते पर संधि हो सकती है. आपकी कार्यकुशलता ...सिंह राशि के लिए वर्ष 2010 (2010 Horoscope Forecast for Simha Rashi)
प्रथम तिमाही- जनवरी से मार्च 2010शनि की साढेसाती के अन्तिम चरण के प्रभाव के कारण, सिंह राशि वाले व्यक्तियों की मानसिक चिन्ताएं बढ़ेंगी. परंतु, स्थिति ...आपने इन्हें पसंद किया
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