मांगलिक दोष का उपचार (Remedies of Manglik Dosha or Kuja Dosha)
मंगल की स्थिति से रोजी रोजगार एवं कारोबार मे उन्नति एवं प्रगति होती है तो दूसरी ओर इसकी उपस्थिति वैवाहिक जीवन के सुख बाधा डालती है. वैवाहिक जीवन में शनि को विशेष अमंलकारी माना गया है.
प्रश्न कुण्डली से विवाह विचार (Marriage Analysis From The Horary Chart)
सोलह संस्कारों में विवाह को सर्वप्रमुख माना जाता है. विवाह के माध्यम से स्त्री और पुरूष का सम्बन्ध बनता है. यह सम्बन्ध दिखने में भले ही लौकिक लगता है लेकिन किसकी जोड़ी किससे बनेगी वह ईश्वर तय करता है. आपके लिए ईश्वर ने क्य तय कर रखा है जानना चाहेंगे, तो देखिये प्रश्न कुण्डली. ...प्रश्न कुण्डली से स्वास्थ्य लाभ (Health Analysis Through Prashna Kundali)
सभी व्यक्ति उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते है। लेकिन मानव शरीर मशीन के समान है इसलिए समय समय पर स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियां आती रहती हैं। स्वास्थ्य में जल्दी सुधार नहीं होने पर चिंता होती है।...शनि एवं विवाह (Saturn and Marriage)
विवाह एवं वैवाहिक जीवन के विषय में ग्रहों की स्थिति काफी कुछ बताती है.सप्तम भाव को विवाह एवं जीवनसाथी का घर कहा जाता है.इस भाव एवं इस भाव के स्वामी के साथ ग्रहों की स्थिति के अनुसार व्यक्ति को शुभ और अशुभ फल मिलता है....राहु महादशा में कालसर्प योग (Kalsarpa Yoga in Rahu Mahadasha)
काल सर्प योग को ज्योतिषशास्त्र में साढ़े साती की तरह महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है (The Kalsarpa Yoga is considered as malefic as the Sadesati).यह योग जिस व्यक्ति की कुण्डली में होता है वह राहु की दशा में आसमान की बुलंदियों को छूता है तो राहु की अशुभ दशा में दु:ख एवं कष्ट भोगता है....शकट योग का संकट (The Peril of Shakat Yoga)
जैसे कुण्डली मे उपस्थित शुभ योग के परिणामस्वरूप शुभ फल की प्राप्ति होती है उसी प्रकार कुण्डली में अशुभ योग होने पर व्यक्ति को उसका अशुभ परिणाम भी भोगना पड़ता है (Malefic yogas yield inauspicious results for the native).अशुभ योगों में से एक है "शकट योग" (Shakat yoga is a malefic yoga)....गोचर फल (Predictions for Transit of Planets)
सभी ग्रह चलायमान हैं.सभी ग्रहों की अपनी रफ्तार है कोई ग्रह तेज चलने वाला है तो कोई मंद गति से चलता है.ग्रहों की इसी गति को गोचर कहते हैं (The movement of planets through the zodiac is called transit).ग्रहों का गोचर ज्योतिषशास्त्र में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रखता है.ग्रहों के गोचर के आधार पर ही ज्योतिष विधि से फल का विश्लेषण किया जाता है....ज्योतिष में संतान योग (Progeny Related Combinations in Vedic Astrology)
गृहस्थ जीवन में संतान सुख की कामना सभी विवाहित स्त्री पुरूष करते हैं.संतान सुख आपको मिलेगा या नहीं यह सब आपकी कुण्डली में स्थित ग्रह निर्धारित करते हैं.किसी की कुण्डली में ग्रहों की ऐसी स्थिति होती है जो उन्हें कई संतानों का सुख देती है. देखिये क्या कहती है आपकी कुण्डली संतान प्राप्ति के संदर्भ में. ...लग्नस्थ ग्रहों का प्रभाव मीन लग्न में (Predictions for Planets Placed in Pisces Ascendant)
मीन लग्न का स्वामी गुरू होता है. इस लग्न में चन्द्र, मंगल और गुरू कारक ग्रह होते हैं. सूर्य, बुध, शुक्र एवं शनि इस लग्न में अकारक ग्रह बनकर मंदा फल देते हैं....कुम्भ लग्न में लग्नस्थ ग्रह (Planets placed in Aquarius ascendant)
कुम्भ लग्न का स्वामी शनि है. इस लग्न में सूर्य, शुक्र एवं शनि शुभ कारक ग्रह होते हैं. चन्द्रमा, मंगल, बुध एवं गुरू अशुभ और अकारक ग्रह होते हैं....मकर लग्न की कुण्डली में लग्नस्थ ग्रह (Planets in Capricorn Ascendant)
मकर लग्न में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वे दुबले पतले होते हैं. समान्यतया इनकी शादी विलम्ब से होती है. इन्हें नियम और अनुशासन पर चलना पसंद होता है. ये थोड़े से जिद्दी और रूढ़िवादी होते हैं...धनु लग्न में लग्नस्थ ग्रहों का फल (Predictions for planets in Sagittarius)
धनु लग्न का स्वामी गुरू है (Jupiter is the lord of Sagittarius Rashi). इस लग्न में जिनका जन्म होता है वे मानवीय गुणों से परिपूर्ण होते हैं. ...वृश्चिक लग्न में लग्नस्थ ग्रह का फल (Placement of Planets in Scorpio Ascendant)
वृश्चिक लग्न का स्वामी मंगल है.सूर्य, चन्द्र, गुरू इस लग्न में कारक ग्रह होते हैं.मंगल भी लग्नेश होने से कारक होता है.अकारक ग्रह के रूप में बुध, शुक्र और शनि मंदा फल देते हैं.लग्न भाव में जब नवग्रह बैठते हैं तो यह किस प्रकार के व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करते हैं, एवं किस ग्रह का क्या फल होता है देखिए!...तुला लग्न में लग्नस्थ नवग्रह (The placement of planets in Libra)
तुला लग्न का स्वामी शुक्र है.इस लग्न में जन्म लेने वाले व्यक्ति दिखने में सुन्दर होते हैं.ये सत्यवादी और अनुशासनप्रिय होते हैं.इनमें परोपकारिता की भावना रहती है.गृहस्थ जीवन भी आमतौर पर खुशहाल होता है.इस लग्न में प्रथम भाव मे स्थित ग्रह के कारण अलग अलग व्यक्तियों को अलग अलग अनुभूति होती है....कन्या लग्न में नवग्रहों का फल (Interpretation for placement of planets in Virgo Ascendant)
बुध कन्या राशि का स्वामी है. इस लग्न में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान, विवेकशील और व्यवसाय में निपुण होता है. इस लग्न में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वे कल्पनाशील और कोमल हृदय के होते हैं. इस लग्न में लग्नस्थ ग्रह का फल अलग अलग होता है जैसे...सिंह लग्न में नवग्रह का फल (The Navagarahas in Leo Ascendant)
जिस व्यक्ति का जन्म सिंह लग्न में होता है वे दिखने में सुन्दर और हृष्ट पुष्ट होते है.ये महत्वाकांक्षी और हठीले स्वभाव के होते हैं.ये जितने साहसी होते हैं उतने ही आत्मविश्वासी होते हैं.इनमें साहस और आत्म विश्वास भरपूर रहता है.राजनीति में इनकी रूचि रहती है.इस लग्न की कुण्डली मे प्रथम भाव में स्थित ग्रह किस प्रकार फल देते हैं इसे देखिए....कर्क लग्न में नवग्रह (Navagraha In Cancer Lagna)
कर्क लग्न का स्वामी चन्द्रमा है.अगर आपका लग्न भी कर्क है तो आप घूमने के शौकीन होंगे.आपकी कल्पनाशीलता और स्मरण क्षमता अच्छी होगी.आप में निरन्तर प्रगति की ओर बढ़ने की इच्छा होगी.अगर आपकी कुण्डली के लग्न भाव में कोई ग्रह बैठा है तो इससे आप प्रभावित होंगे.ग्रहों का प्रभाव आपके लिए शुभ है या अशुभ जानिए....मिथुन लग्न में नवग्रह का प्रभाव (Planets in Gemini Lagna)
राशि चक्र की तीसरी राशि मिथुन है.आपकी कुण्डली के लग्न भाव में यह राशि है तो आपका लग्न मिथुन कहलता है.आपके लग्न के साथ प्रथम भाव में जो भी ग्रह बैठता है वह आपके लग्न को प्रभावित करता है.आपके जीवन में जो कुछ भी हो रहा है वह कहीं लग्न में बैठे हुए ग्रहों का प्रभाव तो नहीं है।...वृष लग्न में लग्नस्थ ग्रहों का फल (Planets in Taurus Lagna)
राशि चक्र की दूसरी राशि वृष है.आपकी कुण्डली के लग्न भाव में यह राशि है तो आपका लग्न वृष कहलता है.आपके लग्न के साथ प्रथम भाव में जो भी ग्रह बैठता है वह आपके लग्न को प्रभावित करता है.आपके जीवन में जो कुछ भी हो रहा है वह कहीं लग्न में बैठे हुए ग्रहों का प्रभाव तो नहीं है।...मेष लग्न में लग्नस्थ ग्रहों का फल (Results for planets located in Aries Ascendant)
मेष लग्न का स्वामी मंगल है.इस लग्न में मंगल लग्नेश और अष्टमेश होता है.गुरू, सूर्य, चन्द्र इस लग्न में कारक ग्रह की भूमिका निभाते हैं (Jupiter, Sun, Moon are the Karakas for this Lagna).बुध, शुक्र और शनि मेष लग्न में अकारक और अशुभ ग्रह का फल देते हैं....रत्न चिकित्सा और ग्रहों से सम्बन्धित रोग (Gem Therapy and Diseases Related to Planets)
प्राचीन काल से रोगों के उपचार हेतु रत्नों का प्रयोग विभिन्न रूपों में किया जाता रहा है.रत्नों में चुम्बकीय शक्ति होती है जिससे वह ग्रहों की रश्मियों एवं उर्जा को अवशोषित कर लेती है (Gems have therapeutic value due to their innate power)....गोचर में शनि (Transits of Saturn)
जन्म पत्रिका के 12 भावो में आकाशीय ग्रहों को जन्म लग्न के अनुसार स्थान दिया जाता है। व्यक्ति के जन्म के पश्चात ग्रह जिस प्रकार से जन्म पत्रिका के चक्र में घूमते हैं उसे ग्रहो का गोचर कहा जाता है। ...विभिन्न भावों में गुरू का प्रभाव- Impact of Jupiter in different Houses
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार बृहस्पति अति प्रभावशाली और शुभ ग्रह है. यह ज्ञान का कारक ग्रह है. यह विद्या, बुद्धि, ज्ञान, विवाह, धन एवं विभिन्न विषयों पर अपना महत्वपूर्ण प्रभाव रखता है. गोचर में गुरू के विभिन्न भावों से गुजरने पर व्यक्ति को अलग अलग परिणाम प्राप्त होता है. ...मंगल लाल किताब में (Mars in Lal Kitab)
लाल रंग का प्रभावशाली और ओजस्वी ग्रह है मंगल.मंगल को उसके पराक्रम के कारण देवताओं का सेनापति भी कहा गया है....लाल किताब मे चन्द्रमा (Moon in Lal Kitab)
चन्द्रमा शुभ ग्रह है.यह शीतल और सौम्य प्रकृति धारण करता है.ज्योतिषशास्त्र में इसे स्त्री ग्रह के रूप में स्थान दिया गया है.यह वनस्पति, यज्ञ एवं व्रत का स्वामी ग्रह है....प्रेम विवाह में ग्रहयोग (Planetary Combinations and Love Marriage)
ज्योतिष के अनुसार ग्रहों की युति भी प्रेम को विवाह की परिणिति तक लेजाने में मददगार होती है....गोचर में राहु का फल (The Results For Rahu's Transit Through 12 Signs)
आकाशीय ग्रहों में राहु केतु का अस्तित्व भले ही नहीं हो परंतु ज्योतिषशास्त्र में अन्य ग्रहों की तरह इसे भी प्रमुखता दी गई है। राहु केतु आभासीय ग्रह (Rahu and Ketu are non-physical planets) हैं जो किसी भी व्यक्ति की जन्म पत्रिका में बैठकर भावानुसार फल प्रदान करते हैं। जन्म समय में गोचर में राहु की स्थिति का व्यक्ति पर काफी प्रभाव पड़ता है (Rahu's transit has a strong impact on a person)। ...मंगली दोष (Manglik Dosha)
मंगल उष्ण प्रकृति का ग्रह है.इसे पाप ग्रह माना जाता है. विवाह और वैवाहिक जीवन में मंगल का अशुभ प्रभाव सबसे अधिक दिखाई देता है....सूर्य के शुभ योग (Auspicious Yoga of Sun)
कुण्डली का विश्लेषण करते समय ग्रहों के योग पर विशेष रूप से विचार करना चाहिए.ज्योतिषीय विधा के अनुसार जब कोई ग्रह किसी भाव में स्वतंत्र होते हैं तो उनका फल अलग होता है जबकि किसी ग्रह के साथ योग करते हैं तो इनका फल परिवर्तित हो जाता है....ग्रहों के नक्षत्र पर राहु का प्रभाव (Rahu's Effect on Nakshatra of Jupiter to Ketu)
सभी ग्रहो के तीन तीन नक्षत्र होते हैं.गोचर में ग्रह जिस नक्षत्र में होता है उस नक्षत्र के अनुसार इनका फल भी परिवर्तित होता है.राहु जब बृहस्पति से केतु के नक्षत्र में होता है तो इस प्रकार से अपना फल देता है ...नवग्रह रत्न लहसुनियां और लाजवर्त (Gemstone Cat's Eye and Lapis Luzuli)
राहु के समान छाया गया केतु होता है. केतु हमेशा वक्री रहता है. मंदा केतु दुर्घटना एवं रोग देता है जिससे शल्य चिकित्सा की भी संभावना बनती है. केतु का रत्न लहसुनियां है जो केतु की उर्जा एवं शक्ति को आकर्षित करके धारण करने वालों को केतु के विपरीत प्रभाव से बचाता है. ...नवग्रह रत्न मोती और पन्ना (Gemstone Pearl and Emerald)
नवग्रह रत्न सिर्फ सौन्दर्य वर्द्धक ही नहीं होते हैं बल्कि इनमें ज्योतिषीय शक्तियां भी होती है. ये ग्रहों से उनकी उर्जा को अवशोषित करते हैं ...नवग्रह रत्न माणिक्य और मूंगा (Gemstone Ruby and Coral)
रत्न खूबसूरत पत्थर होते हैं जिनमें काफी घनत्व होता है.ये विभिन्न रंगों में पाये जाते हैं.अपने गुणों एवं चमत्कारी प्रभाव के कारण ये रत्न कहलाते हैं.नवग्रहों से सम्बन्धित होने के कारण इन्हें नवरत्न कहा जाता है.इनकी संख्या काफी है परंतु भारतीय ज्योतिष में 84 रत्नो को ही मान्यता प्राप्त है....कुण्डली में व्यवसाय और धन की स्थिति (Business and Money in your Birth Chart)
जिन्दगी की गाड़ी को चलाने के लिए रोजगार की जरूरत सभी को होती है. रोजगार का चुनाव सही होता है तो व्यक्ति को कम परेशानी में जल्दी सफलता मिलती है. रोजगार की तलाश में ज्योतिष विज्ञान आपके लिए किस प्रकार सहायक हो सकता है आइये देखें....राशि के अनुसार रोजगार का चुनाव (Rashi and Occupation)
राशियों की कुल संख्या 12 है.जन्म के समय के अनुसार अलग अलग व्यक्ति की अलग अलग राशि होती है.आपकी जो राशि है उनके अनुसार आप अपने लिए सही कैरियर की तलाश कर सकते हैं....ज्योतिष की नज़र में प्रियंका गांधी का राजनैतिक भविष्य (Astrological analysis of Priyanka Gandhi)
प्रियंका गांधी का जन्म राजनीति में लिप्त परिवार में हुआ है इस पारिवारिक माहौल का प्रभाव प्रियंका गांधी के व्यक्तित्व पर भी हुआ है लेकिन ज्योतिष की नज़र से राजनीति की दुनियां में आगे प्रियंका गांधी का क्या स्थिति है आइये देखें....चन्द्र राशि और ग्रहों का गोचर फल (Result of Planetary Transits and Moonsigns)
ग्रहों के गोचर का सामान्य नियम यह है कि जब कोई ग्रह शुभ भाव में गोचर करता है तब शुभ फल देता है परंतु ग्रह का वेध होने पर शुभ फल नहीं मिल पाता है...दशम भाव में ग्रहों की स्थिति और रोजगार (Occupation and Planets in Tenth house)
ज्योतिष का आधार ग्रह और राशियां हैं. इन्हीं से ज्योतिष में फलित का विचार किया जाता है. रोजगार अथवा कैरियर के विषय में दशम भाव से विचार किया जता है....ज्योतिष योग एवं आजीविका (Astrological Yoga and Occupation)
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार कुण्डली के बारह घरों में नवग्रहों की स्थिति को देखकर व्यक्ति की हर प्रकार की उत्सुकता को शांत किय जा सकता है.युवाओं के मन में रोजगार को लेकर विशेष चिंता रहती है....ज्योतिष की दृष्टि में - ज्योतिरादित्य सिंधिया (Astrological Analysis of Jyotiraditya Scindia)
सिंधियावंश का राजनैतिक प्रभुत्व केंद्रीय सत्ता बदलने से भी सदा अपरिवर्तित रहा है. मुगल शासन हो या अंग्रेजों का शासन सिंधिया राजघराना शासन ही करता रहा. आज भी प्रमुख राजनैतिक पार्टियों में इस घराने का प्रभुत्व मौजूद है....मुहूर्त और शुभ योग (Muhurta and Subha yoga)
मुहू्र्त यानी किसी कार्य विशेष के लिए शुभ और अशुभ समय.ज्योतिषशास्त्र की गणितीय विधि में शुभ मुहूर्त के लिए कई विशिष्ट योगों का जिक्र किया गया है....कुण्डली में चन्द्र और मंगल का योग (Moon and Mars combination in Horoscope)
ज्योतिषशास्त्र में चन्द्रमा को शुभ और सौम्य ग्रह के रूप में मान्यता प्राप्त है. मंगल को क्रूर और अशुभ ग्रहों के रूप में स्थान दिया गया है. ...वक्री ग्रह फल विचार (Impact of retrograde planets)
ग्रहों का पथ अंडाकार होने से पृथ्वी की गति से जब अन्य ग्रहों की गति कम होती है तब वे विपरीत दिशा में चलते हुए प्रतीत होते हैं जिससे ग्रहो को वक्री कहते हैं.ग्रह यूं तो निरन्तर अपने पथ पर चलते रहते हैं परंतु ज्योतिषशास्त्र की दृष्टि से ग्रह सीधी चाल से चलते हुए कुछ समय के लिए ठहर जाते हैं ...प्रश्न कुण्डली से रोग एवं उनके उपचार (Diseases and their remedies from Prashna Kundali)
ज्योतिषशास्त्र की दृष्टि से देखा जाए तो जीवन की हर छोटी बड़ी घटना ग्रहों से प्रभावित होती है.स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियों एवं रोग का कारण भी ग्रह हैं.ज्योतिष की विधा प्रश्न कुण्डली रोग के विषय में क्या कहती है ...उपचार महादशाओं का (Remedies for Mahadasha)
ज्योतिष शास्त्र ग्रहों की गति एवं उसकी दशाओं के आधार पर किसी व्यक्ति के जीवन में आने वाली उतार चढ़ाव एवं सुख दुख का आंकलन करता है. ग्रहों की दशा महादशा सभी व्यक्ति के जीवन में चलती रहती है. कुछ दशा महादशा शुभ फल देती है तो कोई अशुभ. ...कालसर्प योग कारण लक्षण उपाय (The remedies of Kalsarpa Yoga)
आपकी कुण्डली में कालसर्प योग है इस बात का पता कुण्डली में ग्रहों की स्थिति को देखकर पता चलता है लेकिन कई बार जन्म समय एवं तिथि का सही ज्ञान नहीं होने पर कुण्डली ग़लत हो जाती है. इस तरह की स्थिति होने पर कालसर्प योग आपकी कुण्डली में है या नहीं इसका पता कुछ विशेष लक्षणो से जाना जा सकता है. ...लाल किताब में शुक्र ग्रह (Shukra Graha in Lal Kitab)
लाल किताब के अनुसार शुक्र ग्रह की कुण्डली में शुभ स्थिति जीवन को सुखमय और प्रेममय बनाती है तो अशुभ स्थिति चारित्रिक दोष एवं पीड़ा दायक होती है. ...कुण्डली में राजयोग (Rajyoga in Horoscope)
ज्योतिष की दृष्टि में राजयोग का अर्थ है ऐसा योग है जो राजा के समान सुख प्रदान करे. हम सभी जीवन में सुख की कामना करते हैं परंतु सभी के भाग्य में सुख नहीं लिखा होता है. कुण्डली में ग्रहों एवं योगों की स्थिति पर सुख दुख निर्भर होता है....कितने प्रकार के होते हैं काल सर्प योग (Types of Kal sarpa yoga)
साढ़े साती और काल सर्प योग का नाम सुनते ही लोग घबरा जाते हैं. इनके प्रति लोगों के मन में जो भय बना हुआ है इसका फायदा उठाकर बहुत से ज्योतिषी लोगों को लूट रहे हैं. बात करें काल सर्प योग की तो इसके भी कई रूप और नाम हैं. काल सर्प को दोष नहीं बल्कि योग कहना चाहिये ...आपने इन्हें पसंद किया
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