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अन्धी कुण्डली (Andhi Kundli In Lal Kitab)
अन्धी कुण्डली का सीधा सम्बन्ध दशम भाव (Direct Relationship WithTenth House) से है. दशम भाव के पाप पीडित होने से कुण्डली अन्धी कही जाती है.
अब मुख्य प्रश्न यह है कि दशम भाव किस प्रकार से पाप पीडित होता है. एक तो बृहस्पति के दशम भाव में (Jupiter In Tenth House) स्थित होने पर यह भाव पाप पीडित होता है क्योंकि मकर राशी में बृहस्पति नीच राशी (Debilitated Jupiter In Capricorn) का होता है. दूसरे दशम भाव में दो या दो से अधिक ऎसे ग्रह स्थित हो जो आपस में शत्रुता रखते हों तो भी यह कुण्डली अन्धी कही जाती है. एक दूसरे से शत्रुता रखने वाले ग्रहो की सारणी (Chart) इस प्रकार हैं:
सारणी (Chart) इस प्रकार हैं:-
ग्रह शत्रु
सूर्य शुक्र, शनि, राहु, केतु
चन्द्रमा राहु, केतु
मंगल बुध, केतु
बुध चन्द्रमा
बृहस्पति बुध, शुक्र
शुक्र सूर्य, चन्द्र, राहु
शनि सूर्य, चन्द्र, मंगल
राहु सूर्य, मंगल, शुक्र
केतु सूर्य, चन्द्र, मंगल
कुण्डली अन्धी होने पर शुभ फल कडे श्रम के उपरान्त ही मिलता है अर्थात फल प्राप्ति के लिए भाग्य के भरोसे न बैठकर कर्म करने पर विशेष ध्यान देना पड्ता है. और अशुभ फल की प्राप्ति शीघ्रता से होती है. अन्धी कुण्डली वाले जातक या जातिका को सर्वप्रथम 10 अन्धो को खाना खिलाना चाहिये तथा अन्य उपाय (Other Remedy) करना चाहिये जिससे कि इसका दुष्प्रभाव कम होकर शुभ ग्रहो के प्रभाव में वृद्धि की जा सके.
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