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लाल किताब

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ग्रहो की समयावधि (Time Period Of Planets In Lal Kitab)

लाल किताब में जन्म से 48 वर्षों तक सभी नौ ग्रहो के नौ ऎसे विशेष वर्ष होते हैं जो ग्रह सम्बन्धित शुभ या अशुभ फल विशेष रुप से प्रदान करते हैं. कौन सा ग्रह किस वर्ष में विशेष फल (Vishesh Phal) देता हैवह इस प्रकार से है.
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टकराव (Collision In Lal Kitab)

प्रत्येक ग्रह अपने से अष्टम भाव (Eighth House) में स्थित ग्रह से शत्रुता करता है एंव उसके शुभ प्रभाव की हानि करता है चाहे वह उसका नैसर्गिक मित्र (Natural Friendship) ही क्यूं न हो. ...
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बुनियाद (Buniyad Kundli In Lal Kitab)

कुण्डली के किसी भी भाव में स्थित ग्रह अपने से नवम भाव (Ninth House) में स्थित ग्रह उसकी बुनियाद होगा. यहाँ पर भी नैसर्गिक शत्रुता-मित्रता (Natural Enmity And Friendship) का नियम लागु नहीं होता. उपरोक्त कुण्डली में लग्न में शुक्र स्थित (Venus In the Ascendant) है एंव नवम भाव में गुरु (Jupiter In Ninth House) स्थित है. ...
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आपसी मदद (Mutual Help Kundli In Lal Kitab)

लाल किताब में दृष्टि के सम्बन्ध में कुछ विशेष नियम है जिनकी समीक्षा हम यहाँ करेंगे. ...
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बनावटी ग्रह (Banawati Planets In Lal Kitab)

लाल किताब पद्वति मे बनावटी ग्रहो (Bnawati Planets) का प्रयोग किया जाता हे। बनावटी ग्रह दो अन्य ग्रहो के आपस में युति सम्बन्ध बनाने पर बनते हैं। जब मूल ग्रह (Mula Grah) किसी कारण से पीडित होता है तो उसे शुभ या बलवान बनाने के लिए बनावटी ग्रह का उपाय (Remedies For Banawati Planets) किया जाता हे। ...
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कुर्बानी के बकरे (Kurbane Ke Bakre In Lal Kitab)

लाल किताब की अपनी एक पद्वति (Own method Of Lal Kitab) है. इसमें जब कोई ग्रह अपने शत्रु ग्रह (Shatru Grah) द्वारा पीडित होता है तो वह अपना अशुभ प्रभाव किसी अन्य ग्रह द्वारा प्रदर्शित करता है. जिस ग्रह के द्वारा वह पीडित ग्रह अपना प्रभाव प्रकट करता है उसे कुर्बानी का बकरा (Kurbane ke Bakre) कहा जाता है. अर्थात पीडित ग्रह (Afflicted Planets) अपनी बलाऎं अपने किसी मित्र पर डालकर स्वयं साफ बच निकलता है. कौन सा ग्रह किस अन्य को कुर्बान करता है वह इस प्रकार से है:- ...
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सोया ग्रह (Sleepy Planets In Lal KItab)

जब पहले भावों (प्रथम से छटे भाव तक) में कोई ग्रह न हो तो (Absent Of Planets Starting From First House To Sixth House) बाद के भावों (सप्तम से द्वादश भाव) (From Seventh House To Twelveth House) के ग्रह सोए हुए माने जाते हैं अर्थात उन ग्रहों का शुभ या अशुभ प्रभाव सिर्फ उसी भाव में होगा जिस भाव में वो स्थित है. ...
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दृष्टियाँ (Aspects In Lal Kitab)

लाल किताब (Lal kitab) में दृष्टि का सिद्धान्त वैदिक ज्योतिष पद्वति से सर्वथा भिन्न है. लाल किताब पद्वति में एक भाव की दृष्टि दूसरे भाव पर होती है. इसमें मुख्यतः तीन प्रकार की दृष्टि (Aspects) होती है. 1) पूर्ण दृष्टि (Full Aspect) 2) अर्द्ध दृष्टि (Half Aspect) 3) चौथाई दृष्टि ( One-Quarter Aspect) ...
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नाबालिग ग्रहो वाली कुण्डली (Nabalig Graho Wali Kundali In Lal Kitab)

बालक के जन्म समय से लेकर 12 वर्ष की उम्र तक की कुण्डली को भी नाबालिग माना जाता है. इस स्थिति में एक से बारह वर्ष की आयु तक फलित देखने का नियम इस प्रकार से है:- ...
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कायम ग्रहो वाली कुण्डली (Kayam Graho Wali Kundli In Lal Kitab)

कायम ग्रह (Kayam Grah) उसे कहते हैं जो कि शत्रु ग्रह की युति व दृष्टि से रहित हो तथा उस ग्रह की राशी व पक्के घर (Pakka Ghar) में भी शत्रु ग्रह न हो तो वह कायम ग्रह अर्थात पूर्ण स्थापित ग्रह कहलाता है. एसा ग्रह पूर्ण रुप से बलवान होता है. ...
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धर्मी कुण्डली (Dharmi Kundli In Lal Kitab)

जब किसी व्यक्ति की कुण्डली के चतुर्थ भाव में राहु या केतु हो (Rahu And Ketu In Fourth House) या फिर कुण्डली के किसी भी भाव में चन्द्रमा के साथ राहु हो या केतु हो (Rahu And Ketu With Moon) तो कुण्डली धर्मी कहलाती है. अन्य स्थिति में जब शनि एकादश भाव (Saturn In Eleventh House) में हो या बृहस्पति व शनि (Combination Of Jupiter And Saturn) की युति कुण्डली के किसी भी भाव में हो तो वह धर्मी कुण्डली कहलाती है. ...
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अन्धी कुण्डली (Andhi Kundli In Lal Kitab)

अन्धी कुण्डली का सीधा सम्बन्ध दशम भाव (Direct Relationship WithTenth House) से है. दशम भाव के पाप पीडित होने से कुण्डली अन्धी कही जाती है. ...
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मुकाबले के ग्रहो वाली कुण्डली (Mukable Ke Graho Wali Kundli In Lal Kitab)

वो ग्रह जिनमें आपस में नैसर्गिक मित्रता (Natural Friendship) हो उनमें से किसी एक ग्रह की राशी या भाव (Sign & Bhava) में कोई शत्रु ग्रह बैठ जाये तो दोनो मित्र ग्रहो की आपस में शत्रुता पैदा हो जायेगी तथा वह कुण्डली मुकाबले के ग्रहो वाली कुण्डली (Mukable Ke Graho Wali Kundli) कहलायेगी. ...
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साथी ग्रहो वाली कुण्डली (Sathi Graho Wali Kundli In Lal Kitab)

जब किसी कुण्डली में ग्रह एक दूसरे की राशी में या एक दूसरे के पक्के घरों में अदल-बदल कर बैठ जायें तो ऎसी कुण्डली साथी ग्रहों वाली कुण्डली (Sathi Graho wali Kundli) कहलाती है. ...
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अन्धराती कुण्डली (Andhrati Kundli In Lal Kitab)

अन्धराती कुण्डली (Andhrati Kundli) केवल दो ग्रहो के कारण बनती है. इसमें सूर्य व शनि का महत्वपूर्ण योगदान होता है अर्थात जब कुण्डली के चतुर्थ भाव में सूर्य (Sun In Fourth House) और सप्तम भाव में शनि (Saturn In Seventh House) हो तो वह कुण्डली अन्धराती कहलाती है अथवा इसे आधी अन्धी कुण्डली (Andhi Kundli) भी माना जाता है. ...
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धोखा देने वाले ग्रह (Dhoka Dene Wale Grah In Lal Kitab)

जब व्यक्ति की कुण्डली नाबालिग (Nabalig) होती है तो उसे बारह वर्षों तक प्रत्येक वर्ष कौन सा ग्रह धोखा देता है उसका विवरण इस प्रकार है:- ...
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