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लाल किताब में दशा पद्धति (35 वर्ष) ( Methods of 'Dasha' in Lal kitab) (35 years)
परन्तु लाल किताब मे दशा पद्धति का अपना अलग नियम (Different methods of dashas in Lal Kitab) है, यहां दशा चक्र 35 वर्ष (Dasha chakra 35 years in Lal Kitab) का होता है। दशा को निकालने का भी अनोखा नियम है लाल किताब में दशा चन्द्र ऩक्षत्र के आधार पर नही़ बल्कि जन्म समय के आधार पर (Dasha based on birth time) निकाली जाती है। जन्म समय के अनुसार दशा का ग्रह (Dasha grah) इस प्रकार है।
जिस दिन जातक का जन्म हो उस दिन के ग्रह को जन्म दिन का ग्रह व जिस समय जन्म हो तो उसे जन्म समय का ग्रह (Planet at the time of birth) कहेगें। जन्म दिन के ग्रह को किस्मत जगाने वाला ग्रह (राशिफल का ग्रह) (Planet of rashi phal) अर्थात जिसका उपाय हो सके, कहेंगे तथा जन्म समय का ग्रह किस्मत का ग्रह (ग्रह फल का ग्रह) (Planet of grah phal) अर्थात जिसका उपाय न हो सके, कहलाता है। जन्म दिन और जन्म समय का ग्रह जब एक ही हो जाये तो ऎसा ग्रह जातक को सदा शुभ फल प्रदान करता है। अर्थात कभी भी बुरा फल नही देता।
उदाहरण स्वरूप मान लो किसी जातक का जन्म रविवार को प्रात: 9 बजे हुआ तो उसका जन्म दिन और जन्म समय दोनो का ग्रह सूर्य हुआ। तो उस जातक का सूर्य कभी भी अहित नही करेगा अर्थात जीवन भर लाभ देगा।
उपरोक्त उदाहरण में सूर्य दशा का ग्रह होगा। और यदि किसी बालक का जन्म दोपहर 2:30 बजे हुआ हो तो दशा का ग्रह शुक्र होगा। दशा तालिका (Dasha Chart) इस प्रकार है.

जिस प्रकार विशोत्तरी दशा चक्र (Vinshottari dasha chakra) के अन्तर्गत अन्तर्दशा (Antardasha) होती हे उसी प्रकार लाल किताब के ग्रह की दशा में भी मध्य के ग्रह होते है जिसे निम्न तालिका से जाना जा सकता है।









मान लो किसी बालक का जन्म बुध दशा (Budh dasha) ग्रह (4:00 PM से सूर्यास्त तक) के अन्तर्गत हुआ है तो उसका 35 वर्षीय दशा चक्र इस प्रकार होगा।

इसके पश्चात फिर बुध से दशा चक्र (Budh dasha chakra) प्रारम्भ होगा। किसी भी व्यक्ति के जीवन में अधिकतर यह चक्र तीन बार (35 x 3 = 105) ही आता है।
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