- आपकी जन्म कुंडली
- कुंडली फलादेश
- कालसर्प दोष चैक
- वर्ष कुंडली
- वर्षफल
- राशिफल
- आज का राशिफल
- मासिक राशिफल
- दैनिक ज्योतिष
- चौघड़िया
- राहुकाल
- आज का पंचाग
- वैवाहिक ज्योतिष
- विवाह मिलान
- मांगलिक दोष
- लाल किताब
- लालकिताब कुंडली
- लालकिताब कुंडली
- अंक ज्योतिष
- आपका नाम
- आपका जन्मदिन
- नाम सलाह
- अन्य
- शुभ राशि रत्न
- शुभ रुद्राक्ष
स्त्री दीर्घ से वैवाहिक जीवन का आंकलन (Assessment of Married Life from Stri Dirgh)
सभी माता पिता चाहते हैं कि उनके बच्चों का जीवन सुखमय और आनन्दमय गुजरे, इसके लिए माता पिता अपनी ओर से हर संभव प्रयास करते हैं। जब बात हो शादी की तब विषय और भी गंभीर हो जाता है क्योंकि यह जीवन भर का मामला होता है। शादी के मामले में जरा सी चूक से बच्चों की ज़िन्दग़ी प्रभावित हो सकती है, यही कारण है कि माता पिता विवाह के विषय को गंभीरता से लेते हुए कुण्डली मिलान करवाते हैं। कुण्डली मिलान के क्रम में दक्षिण भारतीय पद्धति (South Indian Kundli Matching System) में बीस कूटों (Bees Koota) के अन्तर्गत स्त्री दीर्घ (Stri Dirgha) से भी विचार किया जाता है।
दक्षिण भारत में देवर्षि नारद (Devershi Narad) का मत काफी प्रचलित है, इस मत को स्त्री दीर्घ या कन्या दूर (Stri Dirgh or Kanya Door) के नाम से भी जाना जाता है। इस विधि में कन्या के नक्षत्र से वर के नक्षत्र तक गिनना होता है। इसमें 9-9 नक्षत्रों की तीन आवृतियां होती हैं। स्त्री नक्षत्र से पुरूष का नक्षत्र पहले 9 में में होने से पति पत्नी के बीच अनबन रहती है अर्थात रिश्तों में तनाव की स्थिति रहती है, इसी प्रकार स्त्री नक्षत्र से पुरूष नक्षत्र दूसरे 9 में होने से वैवाहिक जीवन में मिली जुली स्थिति रहती है और अगर तीसरे 9 में हो तो इसे उत्तम माना जाता है क्योंकि इस स्थिति में पति पत्नी के बीच वैवाहिक जीवन में प्रेम और अनुराग बना रहता है।
विवाह का एक प्रमुख उद्देश्य यह भी है कि वंश परम्परा कायम रहे अर्थात वंश चलता रहे। इस दृष्टि (Aspect) से स्त्री के नक्षत्र से पुरूष का नक्षत्र 14, 15, 16, 17 एवं 18 वे स्थान पर होने से बहुत ही अच्छा माना जाता है। इस स्थिति के होने से विवाह के पश्चात दम्पत्ति को अनेक संतान का सुख प्राप्त होता है। इससे दम्पत्ति में आपसी प्रेम और सामंजस्य होता है।
श्री नारद जी के मतानुसार स्त्री दीर्घ के अन्तर्गत कन्या के नक्षत्र से पुरूष के नक्षत्र के बीच दूरी होनी चाहिए(Distance in Female Nakshatras from Male Nakshatras) , यह दोनों के लिए शुभ होता है।अगर गिनती में नक्षत्र एक दूसरे के समीप आ जाए तो यह अशुभ माना जाता है क्योंकि इससे शुभफल में कमी आती है। नृदूर दोष (NriDur Dosha) के अन्तर्गत जब नक्षत्रों की गिनती लड़के के नक्षत्र से की जाती है तब बात विपरीत होती है। पुरूष के नक्षत्र से गिनती के क्रम में कन्या का नक्षत्र पास में होना उत्तम माना जाता है। इसमें वर से कन्या का नक्षत्र जितना दूर होता है स्थिति उतनी ही अशुभ मानी जाती है।
नोट: आप कम्पयूटर द्वारा स्वयं जन्मकुण्डली, विवाह मिलान और वर्षफल का निर्माण कर सकते हैं. यह सुविधा होरोस्कोप एक्सप्लोरर में उपलब्ध है. आप इसका 45 दिन तक मुफ्त उपयोग कर सकते हैं. कीमत 1250 रु. जानकारी के िलए यहाँ किलक करे




del.icio.us
Digg

Comments (0 posted):
Post your comment