Vivvo CMS 4.0 Astrology in Hindi http://hindijyotish.com/ ©2007 Spoonlabs d.o.o. Astrology in Hindi http://hindijyotish.com/files.php?file= http://hindijyotish.com/ प्रेम विवाह - Love Marriage analysis through the Birth Chart http://hindijyotish.com/marriage-astrology/love-marriage-analysis-horoscope.html वैवाहिक Tue, 06 Jul 2010 23:06:00 -0400 प्रेम विवाह करने वाले लडके व लडकियों को एक-दुसरे को समझने के अधिक अवसर प्राप्त होते है. इसके फलस्वरुप दोनों एक-दूसरे की रुचि, स्वभाव व पसन्द-नापसन्द को अधिक कुशलता से समझ पाते है. प्रेम विवाह करने वाले वर-वधू भावनाओ व स्नेह की प्रगाढ डोर से बंधे होते है. ऎसे में जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी दोनों का साथ बना रहता है. विवाह समय निर्धारण - Calculating the time of marriage through Mahadasha http://hindijyotish.com/marriage-astrology/calculating-the-time-of-marriage-through-mahadasha.html वैवाहिक Sun, 04 Jul 2010 22:29:00 -0400 विवाह समय निर्धारण के लिये सबसे पहले कुण्डली में विवाह के योग देखे जाते है. इसके लिये सप्तम भाव, सप्तमेश व शुक्र से संबन्ध बनाने वाले ग्रहों का विश्लेषण किया जाता है. जन्म कुण्डली में जो भी ग्रह अशुभ या पापी ग्रह होकर इन ग्रहों से दृ्ष्टि, युति या स्थिति के प्रभाव से इन ग्रहों से संबन्ध बना रहा होता है. वह ग्रह विवाह में विलम्ब का कारण बन रहा होता है. विवाह के लिए प्रश्न कुण्डली में ग्रह स्थिति (The position of planets in the Prashna kundali) http://hindijyotish.com/marriage-astrology/prashna-jyotish-and-marriage.html वैवाहिक Tue, 29 Jun 2010 11:29:00 -0400 विवाह के लिए प्रश्न कुण्डली में सप्तम, द्वितीय और एकादश भाव को देखा जाता है.विवाह के कारक ग्रह के रूप में पुरूष की कुण्डली में शुक्र और चन्द्रमा (Venus are Moon are the karakas for marriage for males) को देखा जाता है जबकि स्त्री की कुण्डली में मंगल और सूर्य को देखा जाता है (Mars and Sun are marriage karakas for females) प्रश्न ज्योतिष से विवाह का विचार - When I will get married - Horary Asrology http://hindijyotish.com/marriage-astrology/when-i-will-get-married.html वैवाहिक Sun, 27 Jun 2010 21:11:00 -0400 विवाह कब होगा इस प्रश्न का विचार करने के लिए द्वितीय, सप्तम, तथा एकादश भाव में कौन से ग्रह हैं इनको देखा जाता है (The second and the seventh house should be assessed for marriage.). शुभ और अशुभ भकूट (Auspicious Bhakoot & malefic Bhakoot in Marriage Compatibility) http://hindijyotish.com/marriage-astrology/choose_prefect_lifepartner_to_bhakoot.html वैवाहिक Mon, 05 May 2008 12:53:00 -0400 ज्योतिष के अनुसार वर और कन्या की कुण्डली मिलायी जाती है। कुण्डली मिलान से पता चलता है कि वर कन्या की कुण्डली मे कितने गुण मिलते हैं, कुल 36 गुणों में से 18 से अधिक गुण मिलने पर यह आशा की जाती है कि वर वधू का जीवन खुशहाल और प्रेमपूर्ण रहेगा. मांगलिक दोष का उपचार (Remedies of Manglik Dosha or Kuja Dosha) http://hindijyotish.com/marriage-astrology/remedies-of-manglik-dosha-kuja-dosha.html वैवाहिक Fri, 26 Jun 2009 04:31:00 -0400 मंगल की स्थिति से रोजी रोजगार एवं कारोबार मे उन्नति एवं प्रगति होती है तो दूसरी ओर इसकी उपस्थिति वैवाहिक जीवन के सुख बाधा डालती है. वैवाहिक जीवन में शनि को विशेष अमंलकारी माना गया है. बृहस्पति एवं शुक्र का दाम्पत्य जीवन पर प्रभाव (Impact of Jupiter & Venus on Married Life) http://hindijyotish.com/marriage-astrology/jupiter-venus-on-married-life.html वैवाहिक Tue, 23 Jun 2009 01:25:00 -0400 बृहस्पति और शुक्र दो ग्रह हैं जो पुरूष और स्त्री का प्रतिनिधित्व करते हैं.मुख्य रूप ये दो ग्रह वैवाहिक जीवन में सुख दु:ख, संयोग और वियोग का फल देते हैं. शनि एवं विवाह (Saturn and Marriage) http://hindijyotish.com/marriage-astrology/saturn-and-marriage.html वैवाहिक Fri, 08 May 2009 17:12:00 -0400 विवाह एवं वैवाहिक जीवन के विषय में ग्रहों की स्थिति काफी कुछ बताती है.सप्तम भाव को विवाह एवं जीवनसाथी का घर कहा जाता है.इस भाव एवं इस भाव के स्वामी के साथ ग्रहों की स्थिति के अनुसार व्यक्ति को शुभ और अशुभ फल मिलता है. प्रेम विवाह में ग्रहयोग (Planetary Combinations and Love Marriage) http://hindijyotish.com/marriage-astrology/planetarycombinations-and-love-marriage.html वैवाहिक Wed, 29 Apr 2009 06:35:00 -0400 ज्योतिष के अनुसार ग्रहों की युति भी प्रेम को विवाह की परिणिति तक लेजाने में मददगार होती है. मंगली दोष (Manglik Dosha) http://hindijyotish.com/marriage-astrology/manglik-dosha.html वैवाहिक Wed, 22 Apr 2009 21:30:00 -0400 मंगल उष्ण प्रकृति का ग्रह है.इसे पाप ग्रह माना जाता है. विवाह और वैवाहिक जीवन में मंगल का अशुभ प्रभाव सबसे अधिक दिखाई देता है. सुखी वैवाहिक जीवन के लिए ज्योतिषीय सलाह (Astrological suggestion for happy married life) http://hindijyotish.com/marriage-astrology/astrological_suggestion_for_happy_married_life.html वैवाहिक Thu, 01 Apr 2010 10:50:00 -0400 ज्योतिषशास्त्र के अनुसार विवाह पूर्व वर और कन्या का मेलापक जांच करने के बाद ही विवाह करना चाहिए ताकि वैवाहिक जीवन आनन्दमय बना रहे.आनन्दमय और सफल वैवाहिक जीवन के लिए ज्योतिषशास्त्र में बताये गये कुछ उपायों को आजमाकर आप गृहस्थी को सुखमय बना सकते हैं. सप्तमांश से विवाह समय निर्घारण (Finding the time of marriage from Saptamansh) http://hindijyotish.com/marriage-astrology/finding-the-time-of-marriage-from-saptamansh.html वैवाहिक Sat, 14 Feb 2009 15:23:00 -0500 ज्योतिषशास्त्र में विवाह के लिए नवमांश को ही आधार माना गया है और इसी के आधार पर विवाह समय का निर्घारण किया जाता है. लेकिन नवमांश के साथ ही सप्तमांश का अध्ययन भी इस संदर्भ महत्वपूर्ण है. वैवाहिक जीवन में बाधा डालने वाले ग्रह योग http://hindijyotish.com/marriage-astrology/malefic-youga-for-marriage.html वैवाहिक Mon, 26 Jan 2009 09:23:00 -0500 जब एक स्त्री और पुरूष वैवाहिक जीवन में प्रवेश करते हें तब उनके कुछ सपने और ख्वाब होते हैं. कुण्डली में मौजूद ग्रह स्थिति कभी कभी ऐसी चाल चल जाते हैं कि पारिवारिक जीवन की सुख शांति खो जाती है. कन्या की कुण्डली में वैवाहिक स्थिति (Girls Kundali & Marriage Match Making) http://hindijyotish.com/marriage-astrology/girls-kundali-marriage-match-making.html वैवाहिक Fri, 16 Jan 2009 12:03:00 -0500 कन्या के माता पिता को अपनी पुत्री की शादी के सम्बन्ध में सबसे अधिक चिन्ता रहती है. कन्या भी अपने भावी जीवन, पति, ससुराल एवं उससे सम्बन्धित अन्य विषयों को लेकर फिक्रमंद रहती है. योगिनी कूट (Yogini Koot) http://hindijyotish.com/marriage-astrology/yogini_koot.html वैवाहिक Tue, 03 Jun 2008 04:27:00 -0400 हमारे देश में ज्योतिष परम्परा के अनुसार जब स्त्री और पुरूष की शादी की बात चलती है तब सबसे पहले दोनों की कुण्डली मिलायी जाती है। कुण्डली मिलाने से ज्ञात होता है कि वर और वधू की कुण्डली में ग्रह, नक्षत्र एवं राशियों में किस तरह का सम्बन्ध बन रहा है। ग्रह नक्षत्र एवं राशियो के मध्य सम्बन्ध का विश्लेषण इसलिए किया जाता है क्योंकि ज्योतिष शास्त्र का मानना है कि ग्रह, नक्षत्र एवं राशियों के बीच जैसा सम्बन्ध होता है वैसा ही प्रभाव हमारे जीवन पर होता है (Astrology says Relation between Planets, Nakshatra and Rashi are very important in astrology, the type of relation between them, decide the type of effect on our life) यानी इनके बीच मित्रता पूर्ण सम्बन्ध है तो आपके बीच भी प्रेमपूर्ण सम्बन्ध रहता है और अगर इनमें दुश्मनी है तो आपके गृहस्थ जीवन में विवाद और कलह होता रहता है। विवाह के संदर्भ में वश्य कूट मिलान का औचित्य (Importance of Vasya Koota in marriage matching system) http://hindijyotish.com/marriage-astrology/vasya_koota_in_marriage_matching_system.html वैवाहिक Sat, 07 Jun 2008 06:13:00 -0400 हमारा समाज मूल रूप से पुरूष प्रधान है। पुरूष प्रधान समाज में यह आशा रखी जाती है कि स्त्रियां पुरूष के अधीन रहे, इसके लिए स्त्रियों पर कई प्रकार की पाबंदियां लगायी जाती है एवं मर्यादा की बेड़ियों में जकड़ने की कोशिश की जाती है। पंच पक्षी विचार(Panch Pakshi Vichar) http://hindijyotish.com/marriage-astrology/panch_pakshi_vichar.html वैवाहिक Tue, 03 Jun 2008 08:49:00 -0400 स्त्री हो या पुरूष सभी शादी से पूर्व यही सपना देखते हैं कि उनका वैवाहिक जीवन प्रेम से परिपूर्ण हो। जीवनसाथी उन्हें और उनकी भावनाओं को समझे और गृहस्थ जीवन में सुख और आनन्द की बरसात होती रहे। विवाह के पश्चात बहुत से लोगों का यह सपना सच होता है तो बहुत से लोगों को मायूसी हाथ लगती है अर्थात उनका वैवाहिक जीवन कलह और अशांति से भरा रहता है। वैवाहिक जीवन में कलह का नज़ारा कई बार ऐसा हो जाता है कि घर-घर नहीं अखाड़ा नज़र आने लगता हैं। वेधवर्ग विचार(Vedh Vargh Vichar) http://hindijyotish.com/marriage-astrology/vedh_vargh_vichar.html वैवाहिक Mon, 02 Jun 2008 18:24:00 -0400 शादी के समय पवित्र अग्नि के सम्मुख स्त्री और पुरूष सदा एक दूसरे का साथ निभाने का वचन देते हैं और संकल्प लेते हैं कि जीवन में सुख की घड़ी हो या दु:ख की दोनों एक दूसरे का दामन थामे रहेंगे फिर कौन सी ऐसी बात होती है जिसके कारण वचन टूट जाते हैं और रिश्ते बिखर जाते हैं। ज्योतिषशास्त्री मानते हैं कि उपरोक्त स्थिति का कारण अशुभ ग्रहों(Inauspicious Planets) का प्रभाव होता है। अगर शादी के पूर्व स्त्री और पुरूष की कुण्डली का सही से मिलान किया जाए और उसके अनुसार वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित किया जाए तो विवाह की सफलता की संभावना अधिक रहती है(For Happy Married it is very important that Kundli matching in a perfect way)। लिंग वर्ग विचार (Ling Vargh Vichar) http://hindijyotish.com/marriage-astrology/ling_vargh_vichar.html वैवाहिक Wed, 04 Jun 2008 22:23:00 -0400 भारतीय ज्योतिष परम्परा के अन्तर्गत ग्रहों एवं नक्षत्रों को अलग अलग वर्ण और विभागों में बॉटा गया है। ज्योतिष के अन्तर्गत नक्षत्रों का लिंगभेद भी किया गया है। अगर आप दक्षिण भारतीय ज्योतिष पद्धति के विषय में जानते हैं तो आपको पता होगा कि वहां 20 कूट के अन्तर्गत एक कूट आता है लिंग वर्ग। जातिकूट (Jati Koot) http://hindijyotish.com/marriage-astrology/jati_koot.html वैवाहिक Mon, 12 May 2008 15:43:00 -0400 विवाह के प्रसंग में कुण्डली मिलाने की प्रथा उत्तर भारत में भी प्रचलित है और दक्षिण भारत में भी (Tradition of Kundli Matching in North India and South India)। कुण्डली मिलाने की इस प्रथा में कई बातें दोनों जगह समान हैं तो कई जगह दोनों में कुछ अंतर भी है। बात करें जातिकूट की तो यह उत्तर भारत में भी मान्य है और दक्षिण में भी परंतु दोनों में कुछ विभेद है। उत्तर भारतीय जातिकूट पद्धति और दक्षिण भारतीय जातिकूट में विभेद को ही हम अपना विषय बनाकर चर्चा को आगे बढ़ाते हैं, तो आइये चर्चा शुरू करें। रज्जुवर्ग विचार(Rajju vargh) http://hindijyotish.com/marriage-astrology/rajju_vargh.html वैवाहिक Mon, 12 May 2008 07:48:00 -0400 दक्षिण भारतीय ज्योतिष पद्धति के अनुसार जब किसी व्यक्ति की वैवाहिक कुण्डली मिलायी जाती है तब 20 कूटों(Kundli matching according to 20 Koot) से विचार किया जाता है। 20 कूटों के अन्तर्गत एक कूट आता है रज्जुवर्ग। रज्जु वर्ग से जब स्त्री-पुरूष की कुण्डली का विश्लेषण (Analysis)किया जाता है तो किस विषय में फलादेश प्राप्त होता है और इससे फलादेश प्राप्त करने का तरीका क्या है यहां हम इसी पर रोशनी डालते हैं। गणकूट में समान गण सर्वोत्तम!(Gankut) http://hindijyotish.com/marriage-astrology/gankut.html वैवाहिक Mon, 12 May 2008 06:04:00 -0400 आपने देखा होगा कि जब भी आपके परिवार में किसी की शादी की बात चली होगी तब आपके माता पिता या घर के बड़े आपकी कुण्डली एवं जिस व्यक्ति के साथ शादी की बात चल रही होती है उनकी कुण्डली लेकर ज्योतिषी महोदय के पास जाते हैं ताकि वे वर और कन्या की कुण्डली का मिलान कर ज्ञात कर सकें कि दोनों की कुण्डली में कितने गुण मिल रहे हैं। गुणों का आंकलन(Assessment of Gunas) करने के लिए अष्टकूट के अन्तर्गत कुल आठ कूटों से मिलान किया जाता है उन्हीं में से एक है गणकूट। भूत वर्ग विचार (Bhoot varg) http://hindijyotish.com/marriage-astrology/bhoot_varg.html वैवाहिक Sat, 10 May 2008 08:20:00 -0400 दुनियां में जितने भी रिश्ते हैं उनमें सबसे नाजुक रिश्ता पति पत्नी का रिश्ता होता है। इस रिश्ते में अगर जरा सी चूक हो जाए तो जीवन एक एक पल बिताना कठिन हो जाता है, यही कारण है कि इस नाजुक रिश्ते की गांठ में बंधने से पहले बहुत अधिक जांच परख की जाती है। आपने देखा होगा कि जब आपके घर में किसी की शादी की बात चलती है तब आपके घर के प्रमुख लोग जाकर देखते हैं कि जिस लड़के अथवा लड़की से शादी की बात चल रही है उनका स्वभाव कैसा है, क्या उन दोनों की जोड़ी सही रहेगी, क्या वे एक दूसरे के योग्य हैं, फिर जाकर शादी की बात आगे बढ़ती है। इतना सब कुछ जांच परख करने के बाद भी कई बार ऐसा देखने में आता है कि पति पत्नी के बीच मनमुटाव है और दोनों अलग हो रहे हैं। आयुवर्ग विचार(Ayu Warg ) http://hindijyotish.com/marriage-astrology/ayu_warg.html वैवाहिक Sat, 10 May 2008 07:22:00 -0400 हमारे देश में महिलाएं अपने पति यानी अपने सुहाग की लम्बी आयु के लिए कामना करती हैं। करवा चौथ(karva Chot), गौरी पूजन(Gauri Pujan), वटसावित्री(Vatsavitri) और न जाने कितने ही व्रत महिलाएं अपने पति की लम्बी आयु के लिए करती हैं। इन तमाम व्रतों एवं पूजन का मुख्य उद्देश्य यह है कि शास्त्रों में बताया गया है कि सुहागन मृत्यु को प्राप्त होना बहुत ही सौभाग्य की बात है। सुहागन मृत्यु होने पर स्त्री को स्वर्ग की प्राप्ति होती है। आय वर्ग विचार (Aye Wargh) http://hindijyotish.com/marriage-astrology/aye_wargh.html वैवाहिक Sat, 10 May 2008 22:06:00 -0400 भारत सांस्कृतिक रूप से विश्व में श्रेष्ठ माना जाता है। भारतीय अध्यात्म और दर्शन विश्व को अपनी ओर आकर्षित करता है। भारतीय अध्यात्म और दर्शन का ही एक अंग है ज्योतिष। ज्योतिष यानी रोशनी दिखने वाला अर्थात भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों पर प्रकाश डालने वाला ज्ञान है ज्योतिष। ज्योतिष के वैदिक शाखा(Banch of Vedic) में कुण्डली से जीवन के विषय में सभी प्रकार के प्रश्नों का हल ढूंढा जाता है। भारतीय परम्परा में विवाह पूर्व वर वधू के आने वाले जीवन के विषय में आंकलन(Assessment) करने के लिए कुण्डली मिलाने(Kundli matching) की परम्परा रही है। महेन्द्र कूट (Mahendra Koot) http://hindijyotish.com/marriage-astrology/mahendra_koot.html वैवाहिक Fri, 09 May 2008 07:02:00 -0400 भारतवर्ष भारतीय महाद्वीप का सबसे बड़ा देश है। इस देश की विशालता और अनेकता में एकता विश्व के लिए आदर्श स्वरूप है क्योंकि भारत जितना विशाल है उतनी ही विस्तृत इसकी सभ्यता, संस्कृति, भाषा, ज्ञान और चिंतन है। ज्ञान, चिंतन एवं संस्कृति के विस्तृत और विविध होने के बावजूद इसका मूल स्वरूप एक ही है। चिंतन की बात करें तो उत्तर भारत में भगवान शिव के बड़े पुत्र को कार्तिकेय के नाम से पूजा जाता है तो दक्षिण(South) में कर्तिकेय मुरूगन स्वामी(Murugan Swami) के नाम से पूजित होते हैं। भगवान कृष्ण की बात करें तो उत्तर में माधव, गोपाल, कृष्ण के नाम से जाने जाते हैं तो दक्षिण में वेणु गोपाल के नाम से विख्यात हैं यानी नाम चाहे कुछ हो परिणाम और विषय वस्तु समान है, यही बात ज्योतिष में भी लागू है। राशीश मैत्रीकूट(Rashish Maitrikoot) http://hindijyotish.com/marriage-astrology/rashish_maitrikoot.html वैवाहिक Thu, 08 May 2008 12:26:00 -0400 विवाह के उद्देश्य से जन्मपत्री से जब कुण्डली में अष्टकूट मिलान(Ashtkoot in kundli) किया जाता है तब भिन्न भिन्न कूटों से गुणों का आंकलन किया जाता है। विवाह से पहले गुणों का आंकलन कुण्डली में इसलिए किया जाता है ताकि पति पत्नी के तौर पर जब हम आप पारिवारिक जीवन में प्रवेश करें तब हमारे दाम्पत्य जीवन में प्रेम और सामंजस्य का भाव बना रहे, कुल मिलाकर एक शब्द में कहें तो कुण्डली में गुणों का मिलान इसलिए किया जाता है ताकि पारिवारिक जीवन में सुख शांति बनी रहे। जब गुणों का आंकलन किया जाता है उस समय अष्टकूट के अन्तर्गत राशीश मैत्रीकूट से भी विचार किया जाता है। स्त्री दीर्घ से वैवाहिक जीवन का आंकलन (Assessment of Married Life from Stri Dirgh) http://hindijyotish.com/marriage-astrology/assessment_of_married_life_from_stri_dirgh.html वैवाहिक Thu, 08 May 2008 05:47:00 -0400 सभी माता पिता चाहते हैं कि उनके बच्चों का जीवन सुखमय और आनन्दमय गुजरे, इसके लिए माता पिता अपनी ओर से हर संभव प्रयास करते हैं। जब बात हो शादी की तब विषय और भी गंभीर हो जाता है क्योंकि यह जीवन भर का मामला होता है। शादी के मामले में जरा सी चूक से बच्चों की ज़िन्दग़ी प्रभावित हो सकती है, यही कारण है कि माता पिता विवाह के विषय को गंभीरता से लेते हुए कुण्डली मिलान करवाते हैं। कुण्डली मिलान के क्रम में दक्षिण भारतीय पद्धति (South Indian Kundli Matching System) में बीस कूटों (Bees Koota) के अन्तर्गत स्त्री दीर्घ (Stri Dirgha) से भी विचार किया जाता है। योनिकूट से कुण्डली में गुण मिलान (yoni Koot) http://hindijyotish.com/marriage-astrology/yoni_koot.html वैवाहिक Wed, 07 May 2008 12:58:00 -0400 इस धरती पर जितने भी जीव हैं वे किसी न किसी योनि से सम्बन्धित हैं अर्थात बकरी, बैल, हाथी, सिंह, चूहा या फिर मनुष्य सभी ईश्वर द्वारा बनायी गयी योनियां हैं। हर योनि की अपनी विशेषता और अपना गुण (Characteristic) है, परंतु यहां हम जीवों की योनियों की बात नहीं कर रहे हैं, बात कर रहे हैं नक्षत्रों की योनियों(Yoniya of Nakshatras) की। ज्योतिष के अनुसार योनि का सम्बन्ध नक्षत्रों से मानी गयी हैं (According to the Astrologer relationship of Yoni from Nakshatras) । नाड़ीकूट विचार (Narikoot) http://hindijyotish.com/marriage-astrology/narikoot.html वैवाहिक Tue, 06 May 2008 12:59:00 -0400 बड़े बूढे कहते हैं कि विवाह के पश्चात व्यक्ति नये जीवन में प्रवेश करता है, बुजुर्गों का यह कहना काफी हद तक सही भी है क्योंकि जैसे जन्म के पश्चात नया माहौल नया परिवेश और कुछ रिश्ते हमसे जुड़ जाते हैं ठीक उसी प्रकार विवाह के पश्चात व्यक्ति एक नये परिवेश और माहौल से रूबरू होता है जहां कई नये रिश्ते और नई बातें सामने आती हैं। विवाह के पश्चात शुरू होने वाले नये जीवन में खुशहाली के लिए कुण्डली मिलान किया जाता है। कुण्डली मिलान के क्रम में अष्टकूट से विचार किया जाता है, इन अष्टकूटों(Ashtkoot) में आठवां और अंतिम कूट है नाड़ी कूट। Astrology in Hindi