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लिंग वर्ग विचार (Ling Vargh Vichar)
दक्षिण भारतीय ज्योतिष पद्धति में नक्षत्रों को कुल तीन लिंग वर्ग में बॉटा गया है जो क्रमश: इस प्रकार हैं 1.स्त्रीलिंग 2.पुल्लिंग 3.नपुंसकलिंग (In South Indian Astrology Nakshatras are divided into there categories of Linga which are 1.Femenin 2.Masculin 3.Neutral)।
ग्रहों का लिंग भेद करते समय किस ग्रह को किस लिंग वर्ग में रखा गया है, सबसे पहले आइये इसे देखें।
1) स्त्रीलिंग नक्षत्र:
उत्तराषाढ़ा(Uttrashada), आश्लेषा (Ashlesha), पूर्वाफाल्गुनी (Purvafalguni), उत्तराफाल्गुनी (Utra Falguni), पूर्वाषाढ़ा(Purvashada), घनिष्ठा(Ghanishta), भरणी (Brahni) तथा विशाखा (Vishakha) नक्षत्र स्त्रीलिंग के अन्तर्गत रखे गये हैं।
2)पुल्लिंग नक्षत्र:
अश्विनी(Ashvini), तिका(Tika), रोहिणी(Rohini), पुष्य(Pushay), पूर्वाभाद्रपद (Purvabhadrapada), उत्तराभाद्रपद (Utrabhadrapada), हस्त(Hast), श्रवण(Sravan), अनुराधा(Anuradha), पुनर्वसु(Punravasu), मघा (Magha) पुल्लिंग नक्षत्र कहलाते हैं।
3) नपुंसकलिंग नक्षत्र:
नपुंसकलिंग के अन्तर्गत मृगशिरा(Mrigshira), मूल एवं शतभिषा इन तीन नक्षत्रों को रखा गया है।
दक्षिण भारतीय ज्योतिष परम्परा के अनुसार अगर नक्षत्रों का आंकलन करते समय स्त्री और पुरूष के नक्षत्र एक लिंगवर्ग में हों तो यह शुभ होता है (According to the Astrology, if bride's and grooms' nakshatra are belongs from the same lingvarga, it is Auspicious for them) जबकि नक्षत्र अगर अलग-अलग लिंगवर्ग में हों तो यह वैवाहिक जीवन के लिए अशुभ होता है। लिंग वर्ग से फलादेश का यह एक तरीका है इसके अलावा कुछ और तरीका है जिनसे भी लिंग वर्ग का विचार किया जाता है।
लिंग वर्ग से फलादेश का अन्य तरीका क्या है चलिए इसे भी जान लेते है। कुण्डली मिलान के दौरान अगर वर का नक्षत्र पुरूष तथा स्त्री का नक्षत्र स्त्री हो तो दोनों को सम्पत्ति लाभ होता है(If Brides nakshatra is Female and Grooms nakshatra is Male, it is good for money point of view)। इस स्थिति में विवाह होने पर दम्पत्ति को धन का लाभ होता है। अगर वर का नक्षत्र स्त्री हो और वधू का नक्षत्र पुरूष हो तो यह वैवाहिक जीवन के लिए कष्टकर माना जाता है। नक्षत्रों के आंकलन में अगर वर-कन्या दोनों के नक्षत्र स्त्रीवर्ग के हों तो धन की हानि होती है। स्त्री और पुरूष दोनों के नक्षत्र अगर नपुंसकलिंग में हों तो यह शुभ फलदायी होता है। इसी प्रकार नपुंसक वर्ग में वर का नक्षत्र तथा स्त्री वर्ग में कन्या का नक्षत्र हो तो इसे सामान्य स्थिति कही जाती है क्योंकि इस स्थिति आर्थिक लाभ की स्थिति सामान्य रहती है।
विवाह के प्रसंग में जब आप कुण्डली मिलान के लिए ज्योतिषशास्त्री से सम्पर्क करें उस समय ध्यान रखें कि आपकी कुण्डली लिंग वर्ग से मिलायी गयी है अथवा नहीं। आप गृहस्थ जीवन में सुख और धन लाभ चाहते हैं तो लिंग वर्ग से विचार करते समय यह देंखें कि आपका जन्म नक्षत्र और जीवनसाथी का नक्षत्र क्रमश: इस प्रकार हो जैसे आप स्त्री हैं और आपका जन्म नक्षत्र स्त्री है तो आपके जीवन साथी का नक्षत्र पुरूष हो, इसी प्रकार आप पुरूष हैं और आपका जन्म नक्षत्र पुरूष है तो आपके जीवनसाथी का नक्षत्र स्त्री हो। आप अगर इस रीति को अपनाते हैं तो संभव है कि आपका वैवाहिक जीवन सुखमय रहेगा।
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