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राशीश मैत्रीकूट(Rashish Maitrikoot)
विवाह के उद्देश्य से जन्मपत्री से जब कुण्डली में अष्टकूट मिलान(Ashtkoot in kundli) किया जाता है तब भिन्न भिन्न कूटों से गुणों का आंकलन किया जाता है। विवाह से पहले गुणों का आंकलन कुण्डली में इसलिए किया जाता है ताकि पति पत्नी के तौर पर जब हम आप पारिवारिक जीवन में प्रवेश करें तब हमारे दाम्पत्य जीवन में प्रेम और सामंजस्य का भाव बना रहे, कुल मिलाकर एक शब्द में कहें तो कुण्डली में गुणों का मिलान इसलिए किया जाता है ताकि पारिवारिक जीवन में सुख शांति बनी रहे। जब गुणों का आंकलन किया जाता है उस समय अष्टकूट के अन्तर्गत राशीश मैत्रीकूट से भी विचार किया जाता है।
राशीश मैत्रीकूट (Rashish MaitriKoota) का अर्थ है राशियों के स्वामी (Lord of Zodiac Sign) के मध्य मित्रता का आंकलन। राशीश वैवाहिक जीवन में सामंजस्य के सम्बन्ध में काफी प्रभावी होते हैं। ज्योतिष के अनुसार राशियों में मित्रता और वैर का भाव होता है, अगर दो विरोधी राशियों के स्त्री पुरूष शादी करते हैं तो उनमें आपस में मतभेद और संघर्ष की स्थिति बनी रहती है।
ज्योतिष ग्रंथों में उल्लेख किया गया है कि इस कूट का सम्बन्ध राशियों से हैं। जब स्त्री और पुरूष की कुण्डली मिलायी जाती है उस समय ज्ञात होता है कि दोनों के राशियों के स्वामी एक हैं अथवा दोनों के राशीश आपस में मित्र हैं तो शादी के लिए इसे बहुत ही शुभ माना जाता है। इस तरह की राशि मिलन होने पर विवाह प्रसंग को आगे बढ़ाया जा सकता है। राशीश मैत्रीकूट का आंकलन करने पर अगर राशियों के स्वामी मित्र-शत्रु या सम शत्रु हों तो विवाह के लिए शुभ नही माना जाता है और अगर दोनों के राशीश अगर शत्रु -शत्रु हों तो यह पर्णत: अशुभ माना जाता है। अगर कुण्डली मिलान करते समय मित्र-शत्रु अथवा शत्रु-शत्रु का सम्बन्ध बन रहा है तो अन्य कूटों के गुणों का समर्थन मिलने पर ही विवाह की बात आगे ले जानी चाहिए।
राशीश मैत्रीकूट के गुणों का आंकलन किस प्रकार होता है अब इसे देखिए।
1.यदि दोनों के राशीश एक हों तो गुणनांक 5 आता है।
2.यदि दोनों के राशीश मित्र-मित्र हों तब भी गुणनांक 5 आता है।
3.यदि दोनों के राशीश मित्र-सम हों तो गुणांक 4 आता है।
4.यदि दोनों के राशीश सम-सम हो तो गुणांक 3 आता है।
5.यदि दोनों के राशीश मित्र-शत्रु हों तो गुणांक 1प्राप्त होता है।
6.यदि दोनों के राशीश सम-शत्रु हों तो गुणांक 1/2 प्राप्त होता है।
7.यदि दोनों के राशीश शत्रु-शत्रु हों तो गुणांक 0 प्राप्त होता है।
ज्योतिष के अनुसार इन स्थितियों में राशीश मैत्री दोष(Aspersion) नहीं लगता है :
1. स्त्री व पुरूष दोंनों के नवमांशेश परस्पर मित्र हों।
2. जिन दो व्यक्ति की कुण्डली का आंकलन(Assessment) किया जा रहा हो उनके नवमांशेश एक हो।
3. जिनकी कुण्डली मिलायी जा रही हो उनकी राशियां भले ही भिन्न हो परंतु नक्षत्र एक हों या फिर नक्षत्र अलग अलग हों परंतु राशि एक हों।
4.सद् भकूट हो।
निष्कर्ष के तौर के कह सकते है कि राशीश के मध्य मैत्री सम्बन्धी का अभाव हों तो राशीश मैत्री दोष माना जाता है और इसमें वैवाहिक सम्बन्ध को उत्तम नहीं माना जाता है।
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