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मूहूर्त

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योग विचार - Sun and moon yoga

ज्योतिष योग कैसे बनते हैं और योग किस प्रकार से हमें शुभ और अशुभ फल प्रदान करते हैं ?
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संतान गोद लेने का मुहुर्त (Muhurta for Child Adoption)

संसार में ऐसा व्यक्ति शायद ही कोई होगा जो सन्तान की कामना न करता हो। सभी माता पिता चाहते हैं जिन लोगों को संतान का सुख प्राप्त नहीं हो पाता है या जो लोग अनाथों के प्रति उदार भाव रखते हैं वे लोग किसी बच्चे को गोद लेना पसंद करते हैं। लेकिन ख्याल रखें के जो भी निर्णय लें वे शुभ मुहुर्त में लें। ...
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Muhurta for journey (यात्रा के सम्बन्ध में मुहूर्त विचार)

हम मनुष्यों को अपने जीवन में दैनिक आवश्यक्ताओं एवं विशेष कार्यों को पूरा करने के लिए यात्रा करनी होती है. जब हम किसी यात्रा पर निकलते हैं तो यही कामना करते हैं कि यात्रा सुखद और शुभ हो. सुखद और सफल यात्रा के लिए शुभ मुहूर्त में यात्रा पर निकलना ज्योतिष की दृष्टि से शुभ माना जाता है. ...
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हवन और यज्ञ करने का मुहुर्त (Muhurta for Yagya or Hawan)

शास्त्रों में बताया गया है कि हम जो हवन या यज्ञ करते हैं उसमें दी गई हवि से यानी हवन सामग्री से देवताओं को बल प्राप्त होता है अर्थात वह उनका आहार है। आपने देवासुर संग्राम के विषय में काफी कुछ पढ़ा या सुना होगा जिसमें आपने देखा होगा कि असुर लोग जब देवताओं को पराजित कर देते थे तब असुर यज्ञ भाग पर अधिकार कर लेते थे ताकि देवताओं की शक्ति क्षीण हो जाए। ...
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विद्यारम्भ संस्कार(Vidyarambh Sanskar)

मानव को मानव इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनके पास बुद्धि और ज्ञान होता है। ज्ञान और बुद्धि में निखार लाने के लिए हम मानव शिक्षा ग्रहण करते हैं। शिक्षा से हमारे संस्कार, विचार और सोचने का तरीका बदलता है और हम सुसंस्कृत बनते हैं जिससे समाज और राष्ट्र के विकास में हम सक्रिय रूप से योगदान दे पाते हैं।...
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वेदारम्भ संस्कार (Veda Arambh Sanskar)

वेद की शिक्षा शुरू करने से पूर्व एक संस्कार किया जाता था जिसे वेदारम्भ संस्कार (Vedarambh sanskar) के नाम से जाना जाता था। आइये इसके विषय में और भी जानकारी हासिल करें।...
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केशान्त संस्कार (Keshant Sanskar)

शास्त्रों में वर्णित सोलह संस्कारों में एक संस्कार है "केशान्त संस्कार"। केशान्त संस्कार को गोदान संस्कार भी कहा जाता है (Keshant Sanskar is known as Godan Sanskar)। बालक जब 16 वर्ष का हो जाता है तब यह संस्कार किया जाता है (This Sanskar is performed when child completes the age of 16)। ...
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कर्ण-वेध संस्कार (Karan Vedh Sanskar)

शास्त्रों में वर्णित सोलह संस्कारो को हमारे मनीषियों ने काफी सोच विचार कर तैयार किया है। यहां हम बात कर रहे हैं "कर्णवेधन संस्कार" की इस संस्कार में स्वास्थ्य को आधार बनाया गया है। ...
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निष्क्रमण संस्कार(Nishkraman Sanskar)

निष्क्रमण संस्कार को पोड्ष संस्कार में 6 स्थान प्राप्त है(Nishkraman Sanskar is the sixth place in podash Sanskar) , अर्थात यह संस्कार सनातन धर्म में छठा संस्कार माना जाता है। नामकरण के पश्चात सनातन धर्म में निष्क्रमण संस्कार किया जाता है(This Sanskar is doing after Namkaran Sanskar)।...
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पुंसवन संस्कार(PunsvanSanskar)

षोड्ष संस्कार के अन्तर्गत दूसरा संस्कार आता है पुंसवन संस्कार(There are other sanskar also in Shodash Sanskar that is Punsvan Sanskar) । भारतीय धर्मशास्त्र जैसे वेद, ब्राह्मण, गृहसूत्र आदि में इन संस्कारों का जिक्र किया गया है(In indian Mythology like Vedas, Brahaman,Grahasutra this Sanskar is mension) । ...
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सीमांतोन्नयन संस्कार (Simantonnyana Sanskar)

हिन्दू समाज में जन्म से लेकर मृत्यु तक और यहां तक कि जन्म से पूर्व गर्भधारण से लेकर गर्भावस्था के पूरे समय तक कुल मिलाकर 16 प्रकार के संस्कार किये जाते हैं(There are 16 Sanskar from Birth till Death in Hindu Religions) ।...
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समवर्तन संस्कार(Samvartan Sanskar)

आप महसूस कीजिए कि आप कई वर्षों से मां पिता से दूर रहकर छात्रावास में अध्ययन कर रहे हैं और जब आप घर लौटते हैं तो उस समय घर में कैसा माहौल होता है। आप देखेंगे कि घर में मां पिता एवं परिवार के अन्य सभी सदस्य हार्दिक प्रसन्नता एवं उल्लास के साथ आपका स्वागत करते हैं। ठीक इसी प्रकार की स्थिति समवर्तन संस्कार की कही जा सकती है। ...
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उपनयन संस्कार (Upnayan Sanskar)

यज्ञ+उपवीत अर्थात यज्ञोपवीत संस्कृति का एक शब्द है जिसका अर्थ होता है यज्ञ द्वारा पवित्र किया गया सूत्र। इस सूत्र को जनेऊ कहते हैं (Yagyo Pavit is the sanskrit word which means a tag which is sacred by Yagyas , That tag is known as Jenau) ।...
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विवाह संस्कार (Vivah Sanskar part II)

ग्रहों का भावों में निषेध(inauspicious house for planets): विवाह मुहुर्त लग्न में, लग्नेश षष्टम, अष्टम भाव में, सूर्य प्रथम, सप्तम भाव में, चन्द्रमा प्रथम, षष्ठी, सप्तम और अष्टम भाव में, मंगल प्रथम, सप्तम, अष्टम, दशम भाव में, बुध सप्तम, अष्टम भाव में, बृहस्पति सप्तम, अष्टम भाव में शुक्र तृतीय, षष्टम, सप्तम, अष्टम भाव में, शनि प्रथम, सप्तम, द्वादश भाव में, राहु-केतु प्रथम, सप्तम भाव में नहीं होने चाहिए। अगर ऐसा है तो इसे मुहुर्त के अनुसार दोषपूर्ण माना जाएगा। ....
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विवाह संस्कार (Vivaha Sanskar Part I)

सोलह संस्कार में विवाह संस्कार का प्रमुख स्थान है(Vivah Sanskar is very important part in Sixteen Sanskar)। इस संस्कार के पश्चात व्यक्ति गृहस्थ जीवन में प्रवेश करता है। विवाह के पश्चात व्यक्ति को पारिवारिक व सामाजिक जीवन का निर्वाह करना होता है। ...
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अन्नप्राशन संस्कार(Ann Prashan Sanskar)

हम सभी जानते हैं कि इस शरीर रूपी मशीन को चलाने के लिए उर्जा और शक्ति की आवश्यक होती है(Energy is very essential for our Body)। उन्न और भोज्य पदार्थों से हमें उर्जा और शक्ति मिलती है। सनातन ध्रर्म के अनुसार जब बच्चों के दांत निकलने शुरू होते हैं और वह पहली बार दूध के अलावा ठोस आहार लेता है तब यह संस्कार किया जाता है, अर्थात पहली बार जब बच्चा शास्त्रोक्त तरीके से अन्न ग्रहण करता है उस संस्कार को अन्नप्राशन संस्कार के नाम से जाना जाता है। ...
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सोलह संस्कार (Sixteen Sanskar)

हिन्दु धर्म में जन्म से लेकर मृत्यु तक कुल सोलह संस्कार बताए गये हैं(According to the Hindu dharma there are 16 Sanskars till Death)। इन संस्कारों का इतिहास अति प्राचीन है, इन संस्कारों का हमारे जीवन में बहुत अधिक महत्व है(Sanskars is very essential in our Life)। प्रत्येक संस्कार हमारे जीवन में बहुत महत्व रखते है। प्रत्येक संस्कार के मुहुर्त में कौन-कौन से नक्षत्र, तिथि आदि का उपयोग होता है अर्थात किस नक्षत्र, तिथि में कौन सा संस्कार किया जाना चाहिए यहां इसका उल्लेख किया जा रहा है। सबसे पहला संस्कार है गर्भधारण संस्कार.......(First sanskar is garbhdharan)।...
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दाह संस्कार (Daha Sanskar)

सोलह संस्कार वास्तव में एक चक्र है जो समय के साथ चलता रहता है(In reality 16 Sanskar is like a chakra which working according to the Time)। यह गर्भधारण से शुरू होता है और विभिन्न चरणों से गुजरते हुए शरीर के अंत के साथ समाप्त हो जाता है। हमारे शास्त्र, पुराण बताते हैं कि आत्मा अमर है यह निरन्तर एक शरीर से दूसरे शरीर में भ्रमण करता है जबतक कि आत्मा अपने परम अंश अर्थात परमात्मा को प्राप्त न कर ले। आत्मा की सदगति के लिए व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात हिन्दू धर्म में दाह संस्कार किया जाता है। ...
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चूड़ाकरण या मुण्डन संस्कार का आधार बौद्धिक विकास..( Chudakarana or Mundan Sanskar)

हमारे मनिषियों ने जितने भी संस्कार बनाये हैं उनका कहीं न कहीं वैज्ञानिक आधार है(Sanskar which is created by Munishaya that all are based on हमारे मनिषियों ने जितने भी संस्कार बनाये हैं उनका कहीं न कहीं वैज्ञानिक आधार है(Hindu sanskar is based on science) बात करें चूड़ाकरण या मुण्डन संस्कार की तो इस संस्कार के पीछे भी कई सिद्धान्त छिपे हैं। पहली नज़र में देखें तो इस संस्कार के द्वारा जन्म के पश्चात पहली बार बाल उतारा जाता है, इससे सिर की सफाई हो जाती है यानी स्वच्छता का सिद्धान्त यहां लागू होता है। इस संस्कार के उद्देश्य की गहराई में देखें तो बहुत सी गूढ़ बातें सामने आती है...........
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करण (Abstraction)

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार पंचांग से समय का आंकलन किया जाता है(Assessment of time according to the Panchang)। किसी कार्य के लिए समय शुभ है अथवा नहीं यह भी पंचांग से देखा जाता है क्योंकि पंचांग बताता है कि ग्रह, नक्षत्र की स्थिति कैसी है और उसका परिणाम कैसा होने वाला है। पंचांग को लेकर हमारे मन में कई बार यह उत्सुकता जगती है कि पंचांग को पंचांग क्यों कहा जाता है। ज्योतिर्विद बताते हैं कि पंचांग के पांच अंक अर्थात तत्व होने से इसे पंचांग कहा जाता है। हम यहां इन्हीं पांच अंगों में से एक अंग करण के विषय में बात करने जा रहे हैं, आइये इस अंग के विषय में विस्तार से जानें.......। ...
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व्यक्तित्व, स्वभाव एवं व्यवहार पर गण का प्रभाव (Significance of Gana on personality, nature and behavior)

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार धरती पर जितने भी व्यक्ति हैं उन पर किसी न किसी गण का प्रभाव रहता है। गण तीन प्रकार के होते हैं। मनुष्य गण, देवगण व राक्षसगण। ज्योतिषशास्त्री कहते हैं कि हमारा जन्म किस गण में हुआ है यह हमारे व्यवहार और शारीरिक बनावट को देखकर बताया जा सकता है। अगर आप जानना चाहते हैं कि यह कैसे संभव है तो आइये देखें......। ...
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जामित्र दोष और वाण पंचक दोष Jamitra Dosha and banpanchak dosha

विवाह के लिए मुहुर्त का आंकलन करते समय देखा जाता है कि इसमें कोई दोष तो नहीं है(Before marriage ensure that Vivah muhurta is favorable for marriage)। मुहुर्त में दोष होने पर अगर विवाह संस्कार किया जाए तो कई प्रकार की बाधाएं व परेशानी वैवाहिक जीवन में आती है। ...
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द्विपुष्कर और त्रिपुष्कर योग का प्रभाव (Effects of Dwipushkar and Tripushkar Yoga)

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार अगर आप अपना काम शुभ मुहुर्त में करते हैं तो आपको कार्य का परिणाम कई गुणा बेहतर मिलता है। मुहुर्त के विषय में ज्योतिषशास्त्र यह भी कहता है कि कुछ योग ऐसे भी होते हैं जिनमें किये गये काम को पुन: दुहराना पड़ता है। यहां हम इसी प्रकार के कुछ योगों की बात कर रहे हैं। यह योग कैसे बनता है, इस योग का प्रभाव क्या होता है और इन योगों का व्यक्ति के जीवन पर क्या प्रभाव होता है आइये हम मिलकर देखते हैं। ...
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शुभ योग है अमृतसिद्धि और सर्वर्थसिद्ध योग (Amritsidhi and Sarvarth siddhi yoga are auspicious)

जब कोई मांगलिक कार्य करना होता है तब हम देखते हैं कि समय कार्य हेतु शुभ है अथवा नहीं। शुभ समय में शुभ कार्य करने की बात ज्योतिषशास्त्र इसलिए कहता है क्योंकि जब हम अच्छे समय में काम की शुरूआत करते हैं तब उसका परिणाम भी अनुकूल होता है। ज्योतिशास्त्र में अच्छा समय शुभ योग कहलता है। शुभ योग में अमृतसिद्धि योग और सर्वार्थसिद्धि योग सभी कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। सर्वाथ सिद्ध योग नाम से ही ज्ञात होता है कि यह योग सभी प्रकार की मनोकामना को पूरा करने वाला योग है। इस योग के विषय में ज्योतिषशास्त्र कहता है कि इस योग के दौरान अगर आप कोई शुभ कार्य शुरू करें तो आपको सम्बन्धित काम में अवश्य सफलता मिलती है। यह योग किस प्रकार निर्मित होता है आइये इसे जानें: ...
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आइये जानें क्या है विषयोग और हुताशन योग (Come to know what is Vish Yoga & Hutashana Yoga)

अशुभ योग की हम बात कर रहे हैं तो विषयोग और हुताशन योग का जिक्र आना स्वाभाविक है (Vish yoga and Hutashana yoga are known as Inauspicious Yoga)। विषयोग नाम से ज्ञात होता है कि आपके शुभ कामों में ज़हर घोलने वाला योग है। ज्योतिषशास्त्री कहते हैं कि इस योग के रहते कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। ...
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कैसे बनता है सूर्य और चन्द्र के मध्य योग (How is yoga generated between sun and Moon)

बात चाहे भौतिक जगत की हो अथवा ज्योतिष की योग शब्द से स्पष्ट होता है कि इसमें दो तत्व शामिल हैं। हमारा विषय ज्योतिष है अत: हम ज्योतिष के सम्बन्ध में योग की चर्चा करेंगे कि योग कैसे बनते हैं और योग किस प्रकार से हमें शुभ और अशुभ फल प्रदान करते हैं(How yoga are Auspicious and Inauspicious)। ...
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शुभ् कार्यों के लिए अशुभ हैं सम्वर्तक और दग्ध योग ( Samvartak yoga and dagdha yoga are inauspicious for auspicious work

अभी तक योग की श्रृंखला में आप दो अशुभ योग के बारे में जान चुके हैं। अशुभ योग की श्रृंखला में तिथि और वार से बनने वाले योग के अन्तर्गत अगला योग आता है सम्वर्तक योग । ज्योतिषशास्त्र में सम्वर्तक योग और दग्ध योग सभी प्रकार के शुभ कार्यों के लिए वर्जित हैं (Astrology says that Samvartak yoga and Dagdha Yoga are Inauspicious for auspicious work)। इस योग के रहते कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। ...
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मृत्यु योग (Mrityu Yoga)

अगर आप देवताओ के अस्तित्व में विश्वास करते हैं तो आपको दानवों के अस्तित्व में भी विश्वास करना होगा (If you believe in God then you have to believe in demon) इसी प्रकार आप पुण्य की बात करते है तो पाप के अस्तित्व में भी यकीन करना होगा और शुभ योग की बात करते हैं तो अशुभ योग को भी सम्मान के साथ स्वीकार करना होगा। व्यावहारिक रूप से देखें तो अच्छाई का पता तभी चलता है जबकि बुराई का ज्ञान हो अगर हम बुराई के विषय में नहीं जानेंगे तो अच्छा कैसे जान सकते हैं। उपरोक्त बातें ज्योतिषशास्त्र के संदर्भ में भी लागू होती है इसलिए हमें शुभ योग के साथ ही अशुभ योग के विषय में भी ज्ञान रखना चाहिए। ...
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काक्रच योग (Kakrach yoga)

तिथि और वार के संयोग से बनने वाले योगों की बात करते हुए श्रृंखला में हम आ पहुंचे हैं काक्रच योग तक (kakroach yoga is created from Tithi, and var)। काक्रच योग भी अशुभ योगों की श्रेणी में आता है (Kakrach yog is also in the group of Inauspicious Yoga)। ज्योतिशस्त्री कहते हैं कि काक्रच योग किसी भी शुभ कार्य के लिए अशुभ होता है। इस योग के रहते हुए शुभ कार्य जैसे शादी, उपनयन, यात्रा, नई योजना की शुरूआत आदि नहीं करनी चाहिए। ...
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मधु सर्पिस योग (Madhusarpish yoga)

मधु सर्पिस योग एक अशुभ योग होता है। इस योग के बनने के लिए तीन तत्वों की आवश्यकता होती है वह है वार, तिथि और नक्षत्र (Combination of Var, Tithi, and Nakshatra are necessary for Madhusarpish yoga)। जब इनका संयोग होता है तब शुभफल प्रदान करने वाले योग भी अशुभ हो जाते हैं जैसे शहद के अंदर विष घोल दिया गया हो, यही कारण है कि इस योग को मधु सर्पिस योग के नाम से जाना जाता है। ...
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