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यात्रा का मुहुर्त- 3 - Yogni Niwas, Tara Sudhhi, Chandra Sudhhi), Ghat, Lagna

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image Yogni Niwas, Tara Sudhhi, Chandra Sudhhi), Ghat, Lagna

यात्रा का मुहुर्त के तीसरे भाग में अब आपका स्वागत है। इस भाग में हम जानेंगे कि योगिनी निवास, तारा, चन्द्र शुद्धि, घात व लग्न यात्रा के संदर्भ में क्या प्रभाव डालते हैं और इनका आंकलन किस प्रकार किया जाता है।

11.योगिनी निवास (Yogni Niwas)
ज्योतिषशास्त्र मे बताया गया है कि यात्रा में सम्मुख और बांयी तरफ की योगिनी से बचना चाहिए.  दाहिने और पीछे की योगिनी शुभ मानी जाती है.  योगिनी का निवास अलग अलग तिथियों मे अलग अलग दिशा में होता है, आइये देखें कि योगिनी किस तिथि को किस दिशा में रहती है।

  • 1.पूर्व दिशा में योगिनी का निवास प्रतिपदा और नवमी तिथि को रहता है।
  • 2. तृतीया और एकादशी तिथि को योगिनी आग्नेश दिशा में निवास करती है।
  • 3.पंचमी और त्रयोदशी तिथि को योगिनी दक्षिण दिशा में निवास करती है। 4.चतुर्थी और द्वादशी तिथि को योगिनी नैऋत्य दिशा में निवास करती है।
  • 5.षष्टी और चतुर्दशी तिथि को योगिनी पश्चिम में रहती है.
  • 6.सप्तमी और पूर्णिमा को योगिनी वायव्य दिशा में वास करती है।
  • 7.द्वितीया और दशमी तिथि के दिन योगिनी उत्तर दिशा में विचरण करती है।
  • 8.अष्टमी और अमावस के दिन योगिनी का निवास ईशान यानी उत्तर पूर्व में रहता है।

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार यात्रा में सम्मुख और बॉयी तरफ की योगिनी से बचना चाहिए। दाहिने और पीछे की ओर योगिनी शुभ मान जाती है।
12.तारा शुद्धि (Tara Sudhhi)
आप यात्रा पर जा रहे हैं तो इस बात का ख्याल रखें कि जिस नक्षत्र में आपका जन्म हुआ है उससे पहला, तीसरा, पांचवां, सातवां, दशवां, बारहवां, चौदहवां, सोलवां, उन्नीसवां, इक्कीसवां, तेइसवां और पच्चीसवां नक्षत्र हो तो उस दिन यात्रा नहीं करें । ज्योतिषशास्त्र के अनुसार इन नक्षत्रों में यात्रा करना नुकसानदेय हो सकता है। अगर आप इन नक्षत्रों का यात्रा में त्याग करें तो उत्तम रहता है इससे आपको तारा दोष से नहीं लगता है, इसे तारा शुद्धि के नाम से भी जाना जाता है (You should avoid Tara Dosha for Travel)।
13.चन्द्र शुद्धि (Chandra Sudhhi)
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार यात्रा पर निकलने से पहले चन्द्रमा की शुद्धि का भी विचार करना चाहिए (You should consider for chandra sudhhi when your are going for Yatra)। आपके जन्म के समय चन्द्रमा जिस राशि में था उस राशि से तीसरा, छठा, दसमा, ग्यारहवां, पहला और सातवें राशि में अगर चन्द्र है तो यह शुभ होता है। यात्रा के दिन अगर चन्द्रमा गोचरवश चतुर्थ, अष्टम अथवा द्वादश राशि में हो तो यात्रा स्थगित कर देना चाहिए, इससे चन्द्र दोष नहीं लगता है (In transit of Moon situated in Fourth, Eight or Twelveth House so you are free from Chandra Dosha)
14.घात (Ghat):
ज्योतिष सिद्धांत के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को अपनी राशि के अनुसार जो घात मास आता है उसका यात्रा के समय विशेष रूप से त्याग करना चाहिए(As per your Sign Avoid travel in month of Ghat)। मान लीजिए व्यक्ति की राशि सिंह है तो उसके लिए फाल्गुन मास, शनिवार मकर राशि का चन्द्रमा, मूल नक्षत्र तथा घनिष्ठा नक्षत्र का प्रथम चरण व तृतीया, अष्टमी और त्रयोदशी तिथि यात्रा के लिए शुभ नहीं माना जाता। इस राशि के जातक को मकर लग्न में भी यात्रा से बचना चाहिए अन्यथा घात लगता है। इसी प्रकार से अन्य राशियों के जातक को भी घात का आंकलन करके यात्रा करना चाहिए।
15.लग्न (Lagna)
यात्रा के लिए आप जिस दिशा में जाना चाहते हैं, उस दिशा से सम्बन्धित लग्न या राशि के होने पर लाभदायक स्थिति रहती है इसे आप एक उदाहरण से समझ सकते हैं, यदि कोई व्यक्ति पूर्व दिशा की यात्रा करना चाहता है तो मेष, सिंह, धनु राशी का लग्न एवं राशि शुभफलदायक रहती है। इसी प्रकार दक्षिण दिशा में यात्रा करने के लिए वृष, कन्या व मकर एवं पश्चिम दिशा में यात्रा करने के लिए मिथुन, तुला एवं उत्तर दिशा में यात्रा करने के लिए कर्क, वृश्चिक एवं मीन लग्न व राशि उत्तम होता है।

जिस व्यक्ति का जो लग्न एवं राशि होती है यदि यात्रा के लिए वही लग्न व राशि का प्रयोग किया जाए तो वह भी अनुकूल फल देता है (You can travel in same lagna and sign for favourable result), यहां इस तथ्य को समझने के लिए हम एक उदाहरण देख सकते हैं, मान लीजिए किसी व्यक्ति का लग्न मेष एवं राशि धनु है, यदि वह व्यक्ति मेष लग्न और धनु राशि या धनु लग्न और धनु राशि या धनु लग्न और मेष राशि में यात्रा करता है तो यात्रा में सफलता मिलने की संभावना अधिक रहती है।

यात्रा के संदर्भ में वर्गोत्तर लग्न और वर्गोत्तम चन्द्र अनुकूल रहता है (Vargottar Lagna or Vargottam Chandra is good for Travel), ऐसे में यदि केन्द्र (1,4,7,10 एवं त्रिकोण (5,9) में शुभ ग्रह तथा 3,6,11भाव में पाप ग्रह हों तो अत्यंत शुभ होता है।

 

चार भाग में लिखी यह श्रंखला निम्नानुसार है

Comments (1 posted):

SATISH KUMAR JAIN on 31 December, 2009 04:08:29
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i want to go on business tour on17 january,2010 on west and west noth direction.how it will be

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