वैदिक ज्योतिष
कन्या लग्न में नवग्रहों का फल (Interpretation for placement of planets in Virgo Ascendant)
बुध कन्या राशि का स्वामी है. इस लग्न में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान, विवेकशील और व्यवसाय में निपुण होता है. इस लग्न में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वे कल्पनाशील और कोमल हृदय के होते हैं. इस लग्न में लग्नस्थ ग्रह का फल अलग अलग होता है जैसे
कर्क लग्न में नवग्रह (Navagraha In Cancer Lagna)
कर्क लग्न का स्वामी चन्द्रमा है.अगर आपका लग्न भी कर्क है तो आप घूमने के शौकीन होंगे.आपकी कल्पनाशीलता और स्मरण क्षमता अच्छी होगी.आप में निरन्तर प्रगति की ओर बढ़ने की इच्छा होगी.अगर आपकी कुण्डली के लग्न भाव में कोई ग्रह बैठा है तो इससे आप प्रभावित होंगे.ग्रहों का प्रभाव आपके लिए शुभ है या अशुभ जानिए....मकर लग्न की कुण्डली में लग्नस्थ ग्रह (Planets in Capricorn Ascendant)
मकर लग्न में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वे दुबले पतले होते हैं. समान्यतया इनकी शादी विलम्ब से होती है. इन्हें नियम और अनुशासन पर चलना पसंद होता है. ये थोड़े से जिद्दी और रूढ़िवादी होते हैं...वृश्चिक लग्न में लग्नस्थ ग्रह का फल (Placement of Planets in Scorpio Ascendant)
वृश्चिक लग्न का स्वामी मंगल है.सूर्य, चन्द्र, गुरू इस लग्न में कारक ग्रह होते हैं.मंगल भी लग्नेश होने से कारक होता है.अकारक ग्रह के रूप में बुध, शुक्र और शनि मंदा फल देते हैं.लग्न भाव में जब नवग्रह बैठते हैं तो यह किस प्रकार के व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करते हैं, एवं किस ग्रह का क्या फल होता है देखिए!...धनु लग्न में लग्नस्थ ग्रहों का फल (Predictions for planets in Sagittarius)
धनु लग्न का स्वामी गुरू है (Jupiter is the lord of Sagittarius Rashi). इस लग्न में जिनका जन्म होता है वे मानवीय गुणों से परिपूर्ण होते हैं. ...तुला लग्न में लग्नस्थ नवग्रह (The placement of planets in Libra)
तुला लग्न का स्वामी शुक्र है.इस लग्न में जन्म लेने वाले व्यक्ति दिखने में सुन्दर होते हैं.ये सत्यवादी और अनुशासनप्रिय होते हैं.इनमें परोपकारिता की भावना रहती है.गृहस्थ जीवन भी आमतौर पर खुशहाल होता है.इस लग्न में प्रथम भाव मे स्थित ग्रह के कारण अलग अलग व्यक्तियों को अलग अलग अनुभूति होती है....ग्रहों के नक्षत्र पर राहु का प्रभाव (Rahu's Effect on Nakshatra of Jupiter to Ketu)
सभी ग्रहो के तीन तीन नक्षत्र होते हैं.गोचर में ग्रह जिस नक्षत्र में होता है उस नक्षत्र के अनुसार इनका फल भी परिवर्तित होता है.राहु जब बृहस्पति से केतु के नक्षत्र में होता है तो इस प्रकार से अपना फल देता है ...सूर्य के शुभ योग (Auspicious Yoga of Sun)
कुण्डली का विश्लेषण करते समय ग्रहों के योग पर विशेष रूप से विचार करना चाहिए.ज्योतिषीय विधा के अनुसार जब कोई ग्रह किसी भाव में स्वतंत्र होते हैं तो उनका फल अलग होता है जबकि किसी ग्रह के साथ योग करते हैं तो इनका फल परिवर्तित हो जाता है....मंगल का अमंगल (Mangal ka Amangal)
मंगल को क्रूर ग्रह के रूप में ज्योतिषशास्त्र में मान्यता प्राप्त है. विवाह के संदर्भ में शनि, राहु, केतु, सूर्य और शुक्र भी परेशानी देना वाला होता है फिर इन ग्रहों की अपेक्षा मंगल का भय सबसे अधिक सताता है....दिशाओं का महत्व वास्तुशास्त्र में! (Importance of Direction in Vastu shashtra)
एक आशियाना हो अपना हर किसी का रहता है सपना.आशियाना हो या कोई भी अन्य भवन इनके निर्माण के लिए हमारे ऋषि मुनियों ने एक विशेष शास्त्र का निर्माण किया जिसे वास्तुशास्त्र के नाम से जाना जाता है.वास्तुशास्त्र में दिशाओं का खास महत्व होता है.दिशाओं के महत्व पर आइये बात करें....वर्ष कुण्डली Varsh Kundli
वर्ष के प्रारम्भ होते ही हमारी उत्सुकता बढ़ जाती है कि नया साल कैसा रहेगा.पूरे साल में घटने वाली घटना के लिए हम वर्ष का राशिफल देखते हैं.ज्योतिषशास्त्र में वर्ष के फल की जांच के लिए वर्ष कुण्डली का प्रयोग किया जाता है.वर्ष कुण्डली किस प्रकार फलों का विवेचन करता है आइये देखें....वास्तुशास्त्र में दिशाओं का महत्व भाग-2 (Importance of Direction in Vastu Shastra part-2)
भवन निर्माण को शुभ माना गया है. इसके लिए एक विशेषशास्त्र लिखा गया है जिसे वास्तुशास्त्र कहा गया है. इसमें कई विषयों का उल्लेख किया गया है जिनसे भवन शुभ होता है और गृहस्वामी को सुख मिलता है. इसमें दिशाओं के विषय में जो बताया गया है उसके अनुसार..........सिंह लग्न में नवग्रह का फल (The Navagarahas in Leo Ascendant)
जिस व्यक्ति का जन्म सिंह लग्न में होता है वे दिखने में सुन्दर और हृष्ट पुष्ट होते है.ये महत्वाकांक्षी और हठीले स्वभाव के होते हैं.ये जितने साहसी होते हैं उतने ही आत्मविश्वासी होते हैं.इनमें साहस और आत्म विश्वास भरपूर रहता है.राजनीति में इनकी रूचि रहती है.इस लग्न की कुण्डली मे प्रथम भाव में स्थित ग्रह किस प्रकार फल देते हैं इसे देखिए....मेष राशि के लिए वर्ष 2010 (2010 Horoscope Forecast for Mesha Rashi)
प्रथम तिमाही- जनवरी से मार्च 2010 व्यावसायिक की दृष्टि से यह समय आपके पक्ष में रहेगा. इस अवधि में भाग्य के सहयोग से आय में ...वृष लग्न में लग्नस्थ ग्रहों का फल (Planets in Taurus Lagna)
राशि चक्र की दूसरी राशि वृष है.आपकी कुण्डली के लग्न भाव में यह राशि है तो आपका लग्न वृष कहलता है.आपके लग्न के साथ प्रथम भाव में जो भी ग्रह बैठता है वह आपके लग्न को प्रभावित करता है.आपके जीवन में जो कुछ भी हो रहा है वह कहीं लग्न में बैठे हुए ग्रहों का प्रभाव तो नहीं है।...मेष लग्न में लग्नस्थ ग्रहों का फल (Results for planets located in Aries Ascendant)
मेष लग्न का स्वामी मंगल है.इस लग्न में मंगल लग्नेश और अष्टमेश होता है.गुरू, सूर्य, चन्द्र इस लग्न में कारक ग्रह की भूमिका निभाते हैं (Jupiter, Sun, Moon are the Karakas for this Lagna).बुध, शुक्र और शनि मेष लग्न में अकारक और अशुभ ग्रह का फल देते हैं....सप्तम से द्वादश तक द्वादशेश का फल (Dwadshes Seventh house to Twelveth House)
द्वादशेश को व्ययेश भी कहते हैं क्योंकि, द्वादश भाव व्यय का घर होता है.किसी भाव में यह शुभ और उत्तम फल देता है तो किसी में अशुभ फल देता है.आपकी कुण्डली मे द्वादशेश कहां है और क्या फल दे रहा है आइये देखें....लग्न से षष्टम तक द्वादशेश का फल (Dwadshes Lagna to Sixth House)
जन्म कुण्डली में 12 घर होते है जिसे भाव कहा जाता है.जैसे किसी संस्था को चलाने के लिए अलग अलग विभाग होते हैं इसी प्रकार सभी भाव अलग अलग कार्यों से सम्बन्धित होते हैं.12 भाव व्यय भाव होता है.इस भाव का स्वामी किस प्रकार अपना फल देता है आइये देखें....ग्रह योग का फल (Grah yogfal)
ज्योतिष 12 घर और नौ ग्रहों का शास्त्र है.इन्हीं बारह घरों में बैठकर नवग्रह अपना अपना प्रभाव दिखाते हैं.किसी की कुण्डली में किसी स्थान पर कोई ग्रह व्यक्ति को माला माल कर देता है तो किसी की कुण्डली में वही ग्रह जिन्दगी को परेशान कर देता है.आइये देखें आपकी कुण्डली में बैठा ग्रह क्या गुल खिला रहा है....रोजगार और दशमेश का प्रभाव (Occupation or Dushmesh)
रोजगार और कारोबार के विषय में कुण्डली में दशम भाव से विचार किया जाता है.दशम भाव में स्थित राशि और राशि स्वामी का इसपर विशेष प्रभाव होता है.दशम भाव में स्थित राशि यानी दशमेश की स्थिति से रोजी रोजगार के विषय में ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है....दशमेश और रोजगार (Occupation and Lord of the tenth house)
दशम भाव में जो राशि होती है उसके स्वामी को दशमेश कहा जाता है। रोजगार और जीविका के संदर्भ में दशम भाव से विचार किया जाता है। बहुत से लोगों की कुण्डली में यह स्थान ग्रह से रहित होता है इस स्थिति में दशमेश की स्थिति के आधार पर फल कथन किया जाता है। ...कुण्डली में व्यवसाय और धन की स्थिति (Business and Money in your Birth Chart)
जिन्दगी की गाड़ी को चलाने के लिए रोजगार की जरूरत सभी को होती है. रोजगार का चुनाव सही होता है तो व्यक्ति को कम परेशानी में जल्दी सफलता मिलती है. रोजगार की तलाश में ज्योतिष विज्ञान आपके लिए किस प्रकार सहायक हो सकता है आइये देखें....राशि के अनुसार रोजगार का चुनाव (Rashi and Occupation)
राशियों की कुल संख्या 12 है.जन्म के समय के अनुसार अलग अलग व्यक्ति की अलग अलग राशि होती है.आपकी जो राशि है उनके अनुसार आप अपने लिए सही कैरियर की तलाश कर सकते हैं....ज्योतिष की नज़र में प्रियंका गांधी का राजनैतिक भविष्य (Astrological analysis of Priyanka Gandhi)
प्रियंका गांधी का जन्म राजनीति में लिप्त परिवार में हुआ है इस पारिवारिक माहौल का प्रभाव प्रियंका गांधी के व्यक्तित्व पर भी हुआ है लेकिन ज्योतिष की नज़र से राजनीति की दुनियां में आगे प्रियंका गांधी का क्या स्थिति है आइये देखें....चन्द्र राशि और ग्रहों का गोचर फल (Result of Planetary Transits and Moonsigns)
ग्रहों के गोचर का सामान्य नियम यह है कि जब कोई ग्रह शुभ भाव में गोचर करता है तब शुभ फल देता है परंतु ग्रह का वेध होने पर शुभ फल नहीं मिल पाता है...दशम भाव में ग्रहों की स्थिति और रोजगार (Occupation and Planets in Tenth house)
ज्योतिष का आधार ग्रह और राशियां हैं. इन्हीं से ज्योतिष में फलित का विचार किया जाता है. रोजगार अथवा कैरियर के विषय में दशम भाव से विचार किया जता है....ज्योतिष योग एवं आजीविका (Astrological Yoga and Occupation)
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार कुण्डली के बारह घरों में नवग्रहों की स्थिति को देखकर व्यक्ति की हर प्रकार की उत्सुकता को शांत किय जा सकता है.युवाओं के मन में रोजगार को लेकर विशेष चिंता रहती है....ज्योतिष की दृष्टि में - ज्योतिरादित्य सिंधिया (Astrological Analysis of Jyotiraditya Scindia)
सिंधियावंश का राजनैतिक प्रभुत्व केंद्रीय सत्ता बदलने से भी सदा अपरिवर्तित रहा है. मुगल शासन हो या अंग्रेजों का शासन सिंधिया राजघराना शासन ही करता रहा. आज भी प्रमुख राजनैतिक पार्टियों में इस घराने का प्रभुत्व मौजूद है....मुहूर्त और शुभ योग (Muhurta and Subha yoga)
मुहू्र्त यानी किसी कार्य विशेष के लिए शुभ और अशुभ समय.ज्योतिषशास्त्र की गणितीय विधि में शुभ मुहूर्त के लिए कई विशिष्ट योगों का जिक्र किया गया है....कुण्डली में चन्द्र और मंगल का योग (Moon and Mars combination in Horoscope)
ज्योतिषशास्त्र में चन्द्रमा को शुभ और सौम्य ग्रह के रूप में मान्यता प्राप्त है. मंगल को क्रूर और अशुभ ग्रहों के रूप में स्थान दिया गया है. ...- आपकी कुंडली में शुभ योग (Shubh Yoga in your Kundli)
- दैनिक - ज्योतिष (Daily Astrology) - Hindi Rashifal
- हस्तरेखा से जानिए अपना भाग्य (Know your fortune through Palmistry)
- कालसर्प योग (Kal Sarp Dosha) भी शुभ फल देता है
- तुला राशि के लिए वर्ष 2010 (2010 Horoscope Forecast for Tula Rashi)
when i am having putra yog
my dob is 4.8.80 at 2.40pm in bilaspur[cg] i get married 1 year ago i want to know that when will i get child. please ...
meri shaadi kab hogi ? aur love hogi ya arrange marriage?
DOB: 28TH August 1977
TIME: Near about 9:20 AM
DAY: Sunday
PLACE : ...
mai naukri kab paunga aur mere shadi us ladki se hoge ya nahi jisse mai chahta hu
dob----13-03-1991
time---07.00am
citu---gorakhapur(u.p)
meri dob. 8.oct.1992 plz bataiye sadi kab hogi love hogi ya aarang..
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