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वैदिक ज्योतिष

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साढ़े साती का फेर (All about Shani's Sade Sati)

आपने देखा होगा शनिवार को काफी संख्या में लोग शनि मंदिर में जाकर तेल, तिल, उड़द आदि शानि देव को भेंट करते हैं एवं दीया जलाते हैं। शनि देव के प्रति इस प्रकार की भक्ति का कारण है अनजाना भय। इस अनजाने भय का नाम है ढईया और साढ़े साती। हम यहां इसी अनजाने भय से रूबरू होते हैं और बात करते हैं साढ़े साती के विषय में.
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ग्रहों की दृष्टि से प्राप्त होने वाला बल है "दृग बल" (Drig bala originates from Planetary Aspects)

सामान्य शब्दों में कहें तो दृग का अर्थ होता है देखना। ज्योतिष विधान के अनुसार बात करें तो दृग बल से तात्पर्य है "दृष्टि बल"(In Jyotish Drig Bala means Drishti Bala)।...
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ग्रहों का नैसर्गिक बल (Natural Strength of Planets)

शड्बल के अन्तर्गत ग्रहों के नैसर्गिक बल को भी देखा जाता है। इस बल का आंकलन किस प्रकार किया जाता है आइये इस विषय पर विचार करें। ...
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ज्योतिष में पंच पक्षी का मूलभूत सिद्धान्त (Principle of Panchpakshi in Astrology)

दक्षिण भारतीय ज्योतिष सिद्धान्त में समय को पांच भागों में बॉटा गया है। समय का विभाजन पक्षी के रूप में किया गया है। इस सिद्धांत के अनुसार हम जब कोई कार्य करते हैं उस समय जिस पक्षी की स्थिति होती है उसी के अनुरूप हमें फल मिलता है। ज्योतिष का यह सिद्धान्त पंच पक्षी के नाम से जाना जाता है। ...
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Relation Between Astrology and science (ज्योतिष और विज्ञान में सम्बन्ध)

ज्योतिषशास्त्र एक प्रकार का विज्ञान है परंतु कुछ आलोचक इसे विज्ञान के रूप में स्वीकार करने से इंकार करते हैं और अपने अपने तर्क देते हैं. क्या आलोचकों के तर्क सही हैं और ज्योतिष विज्ञान है अथवा नहीं आइये देंखें. ...
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पंचपक्षी से जीवन चक्र का आंकलन (Assessment of the life through Panch-Pakshi)

ज्योतिषशास्त्र में पंच पक्षी सिद्धान्त तमिल विद्वानों द्वारा खोज किया गया एक महत्वपूर्ण सिद्धान्त हैं। यह सिद्धान्त बताता है कि हर दिन समय का एक चक्र नियत रूप से चलता रहता है। इस चक्र के परिणाम स्वरूप लाभ हानि एवं उपलब्धि हमें प्राप्त होती है। ...
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व्यक्ति के चरित्र और स्वभाव पर जन्मतिथि का प्रभाव पार्ट-2 (Impact of birth date Part-2)

तिथियों के दूसरे भाग में आपका स्वागत है। प्रथम भाग में आपने जाना कि प्रतिपदा से षष्टी तिथि तक जन्म लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव कैसा होता है। इस भाग में आप जानेंगे कि सप्तम तिथि से अमावस्या तिथि तक जन्म लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव व चरित्र कैसा होता है। ...
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षड्बल में काल बल भाग-2 (Kala bala In Shad bala part-2)

षड्बल के अन्तर्गत अबतक आपने काल बल के पहले भाग में नतोन्नत बल, पक्षबल और त्रि-भाग बल के विषय में आप जान चकु हैं। षड्बल के अन्तर्गत काल बल के दूसरे भाग में प्रस्तुत है वर्ष मास दिन होरा, आयन और युद्ध बल। ...
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शड्बल के 6 प्रमुख भागों में से चौथा है चेष्टा बल (Chesta bala is the fourth part of Shadbala)

चेष्टा का अर्थ होता है गतिशीलता (Chesta means to try or motion)। जिस बल से ग्रह गतिमान होते हैं वह उनका चेष्टा बल कहलाता है जैसे सूर्य का चेष्टा बल आयन बल होता है। ...
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शड्बल में कालबल से ग्रहों की शक्ति का आंकलन (Assessment of Planetary Strength as per Kaala Bala)

आपकी कुण्डली में ग्रह कितने बलवान हैं यह भी गणितीय ज्योतिष पर आधारित षड्बल से ज्ञात किया जाता है। शड्बल के मुख्य 6 बलों में से एक बल है काल बल, जिसका जिक्र हम यहां करने जा रहे हैं। ...
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षड्बल में स्थान बल भाग एक! (Sthan Bala in Shadbala Part-1)

किसी भी व्यक्ति के जीवन के विषय में सही सही फलादेश ज्ञात करने के लिए ग्रहों के बल को जानना आवश्यक है यह हम सभी जानते हैं। ग्रहों का बल ज्ञात करने के लिए ज्योतिषशास्त्र में षड्बल का प्रयोग किया जाता है। ...
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षड्बल में दिग्बल का महत्व (Importance of Digbala in Shadbala)

जैसा कि आप जानते हैं किसी भी वस्तु का बल मापने के लिए एक मापक होता है। ज्योतिषशास्त्र में भी ग्रहों का बल मापने के लिए एक मात्रक तैयार किया गया है जिसे षड्बल कहते हैं। षड्बल के अन्तर्गत मुख्यरूप से 6 प्रकार के बल......
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स्थान बल के प्रकार, 'भाग दो' (Sthana Bala Part-2)

स्थान बल के पांच उपभागों में से प्रथम दो यानी उच्च बल (uchha bal)और सप्तवर्ग बल(Saptvarg bal) के विषय में आप स्थान बल भाग प्रथम में पढ़ चुके होंगे।स्थान बल के दूसरे भाग में हम स्थान बल के शेष तीन भागों पर चर्चा करेंगे। स्थान बल के शेष तीन भाग हैं दिवा-रात्रि बल, केन्द्रादि बल और द्रेष्कोण बल। ...
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व्यवहारिक होते हैं मकर राशि के जातक। (Capricorn Natives are practical people)

राशियों की गिनती में दशवें स्थान पर आती है मकर राशि (Capricorn Natives are practical people)। यह राशि दक्षिण दिशा की स्वामिनी है। इसकी गिनती स्त्री राशि के रूप में होती है। इस राशि में पृथ्वी तत्व की प्रधानता रहती है। ...
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उर्जावान होते हैं वृश्चिक लग्न के जातक। (Native of Scorpio are energetic person)

वृश्चिक का स्थान राशिमंडल में आठवां हैं (Scorpio is the eighth sign of zodiac)। इस राशि में जल तत्व की प्रधानता रहती है। यह राशि स्त्री संज्ञक राशि कहलाती है। वृश्चिक को उत्तर दिशा का स्वामित्च प्राप्त होता है और मंगल इसका स्वामी होता है (Mars is the lord of Scorpio)। ...
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गहरी अन्तर्दृष्टि रखते हैं मीन राशि के जातक। (Pisceans have intuitive power)

मीन राशि स्त्री राशि कहलाती है। इस राशि में जल तत्व की प्रधानता रहती है। जो व्यक्ति इस राशि में जन्म लेते हैं उसके विषय में ज्योतिषशास्त्र क्या कहता है आइये देखें। ...
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नवीनता के पोषक होते हैं कुम्भ राशि के जातक। (Aquarians like new thing)

कुम्भ राशि राशियों की गिनती के क्रम में ग्यारहवें स्थान पर आती है (Aquarius is eleventh sign in zodiac)। इस राशि का चिन्ह एक व्यक्ति है जिसके हाथ में जल से भरा घड़ा है। इस राशि का स्वामी शनि होता है (Saturn is the lord of Aquarius)। ...
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ग्रहों की शक्ति का मापक है 'षड्बल' (Shadbala measures Planetary Strength)

ज्योतिषशास्त्र कहता है हमारे जीवन पर ग्रहों का प्रभाव ता-उम्र रहता है। अगर ग्रह शुभ हो और शुभ स्थान पर विराजमान हों तो आपको शुभ फल की प्राप्ति होती है। ग्रहों की शुभ स्थिति के साथ ही देखा जाता है कि ग्रह कितने बलवान और मजबूत हैं।...
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कला प्रेमी होते हैं मिथुन राशि के जातक। (Native of Gemini Sign known as art lover)

बारह राशि चक्र में मिथुन का स्थान तीसरा है(Gemini is the third zodiac sign) । इस राशि की गिनती पुरूष राशि में की जाती है। इस राशि की पहचान है एक साथ दो व्यक्ति। इस राशि के देवता भगवान विष्णु हैं और राशि स्वामी बुध को माना जाता है (God Vishnu is the Lord of Gemini sign)।...
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हस्तक्षेप पसंद नहीं करते हैं सिंह राशि के जातक। (Native of Leo sing doesn't like interference)

सिंह राशि, राशि चक्र में पांचवें नम्बर पर आता है (Leo is the Fifth sign of zodiac)। इस राशि की पहचान सिंह हैं। इस राशि में अग्नि तत्व की प्रधानता रहती है। यह राशि स्थिर स्वभाव वाली होती है। इस राशि को पूर्व दिशा का स्वामित्व प्राप्त होता है। इस राशि के स्वामी सूर्यदेव हैं(Sun is the lord of Leo), इसमें कोई भी ग्रह उच्च या नीच का नहीं होता है। ...
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जीवनसाथी के प्रति वफादार होते हैं वृष राशि के जातक। (Native of Taurus sign Known as faithful life partner)

वृष राशि को ज्योतिषशास्त्र में दूसरा स्थान प्राप्त होता है (Taurus is the second zodiac sign)। वृष को शुभ राशियों में गिना जाता है इस राशि का चिन्ह "बैल" है। जिनका जन्म वृष राशि में हुआ है उनके विषय में आप यहां जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। ...
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भावुक होते हैं कर्क नक्षत्र के जातक।(Native of Cancer sign known as sensitive and emotional person)

कर्क राशि राशिमंडल में चौथी राशि होती है(Fourth zodiac sign cancer)। कर्क राशि को चर राशि के नाम से जाता है। जिन व्यक्तियों का जन्म इस राशि में होता है वे कैसे होते हैं व उनकी जीवनशैली किस प्रकार की होती है आइये इसे देखें। ...
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शर्मीले और संकोची होते हैं कन्या राशि के जातक। (Native of Virgo are shy and diffident)

कन्या राशि की पहचान हाथ में फूल की डाली लिये कन्या है। कन्या राशि, राशि चक्र में छठे स्थान पर आता है (Virgo is the sixth sign of zodiac)। इस राशि को दक्षिण दिशा का स्वमित्व प्राप्त है (Virgo is the king of south)। ...
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आलोचनात्मक प्रवृति के होते है तुला राशि के जातक। (Native of Libra are critical nature)

तुला राशि की पहचान चिन्ह है तराजू यानी (तुला)। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार तुला को पश्चिम दिशा का स्वामित्व प्राप्त होता है (Libra is the king of west)। तुला राशि के विषय में ज्योतिषशास्त्र क्या कहता है हम इन्हीं बातों पर यहां चर्चा कर रहे है। ...
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ज्ञान के प्यासे होते हैं धुन राशि के जातक। ( Native of Sagittarius want to acquire more knowledge)

धनु राशि की पहचान धनुष है। राशि मंडल में धनु का स्थान नवम है (Sagittarius is the ninth sign of zodiac)। इस राशि के स्वामी बृहस्पति देव हैं (Jupiter is the lord of sagittrarius)। ...
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महत्वाकांक्षी होते हैं मेष लग्न के जातक। (Native of Aries Sign are very ambitious)

वैदिक ज्योतिष के अन्तर्गत कुल 12 राशियां होती है। इन राशियों में सबसे पहली राशि मेष होती है (Aries is the first sign in all zodiac sign)। इसकी पहचान मेढ़ा या भेड़ की आकृति से की जाती है। इसकी गिनती क्रूर राशियों में होती है। इस राशि मे जन्म लेने वाले व्यक्ति के विषय में आइये जानें:...
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शांति पसंद होते हैं घनिष्ठा नक्षत्र के जातक (Native of Ghanistha Nakshatra known as peace lover)

नक्षत्र मण्डल के 27 नक्षत्रो में घनिष्ठा का स्थान 23 वां हैं (Ghanistha is the 23rd Nakshatra in the group of Constellation)। इस नक्षत्र के स्वामी मंगल हैं (Mars is the Lord of Dhanishta Nakshatra) इस नक्षत्र में जो व्यक्ति जन्म लेते हैं उनका व्यवहार, उनकी जीवनशैली एवं उनका स्वभाव सभी कुछ जन्म नक्षत्र उसके स्वामी एवं राशि स्वामी पर निर्भर करता है। आइये जानें कि इस नक्षत्र में जिनका जन्म होता है उनका स्वभाव, व्यवहार एवं व्यक्तित्व कैसा होता है। ...
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हंसते हंसाते जीते हैं जि़न्दग़ी उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के जातक (Native of Uttarashadha Nakshatra live Happy life)

नक्षत्र मंडल में उपस्थित सभी नक्षत्र का अपना गुण और प्रभाव होता है। ज्योतिष सिद्धांत के अनुसार हमारा व्यक्तित्व, जीवन और हमारे विचार एवं व्यवहार आदि उस नक्षत्र और उसके स्वामी एवं राशि और राशि स्वामी से निर्देशित होते हैं जिसमें हमारा जन्म होता है। बात करें उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के विषय में तो इस नक्षत्र के स्वामी सूर्य ग्रह (विश्वदेव) होते हैं (The Sun is the lord of Uttarashadha Nakshatra)। ...
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माता पिता के भक्त होते हैं श्रवण नक्षत्र के जातक (The Native of Shravan Nakshatra are adorer of mother & father)

ज्योतिषशास्त्र में नक्षत्रों की महत्ता का बखान मिलता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार व्यक्ति जिस नक्षत्र में जन्म लेता है उस नक्षत्र का प्रभाव व्यक्ति पर जीवन भर रहता है। जन्म नक्षत्र, नक्षत्र स्वामी और उसकी राशि एवं राशि स्वामी से व्यक्ति सदा प्रभावित रहता है। यहां देखते हैं कि श्रवण नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति पर इसका प्रभाव होने पर व्यक्ति का व्यक्तित्व, स्वभाव एवं व्यवहार कैसा होता है। ...
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यथार्थ में विश्वास करते हैं उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के जातक( Native of Uttra_Vadrapada Nakshatra known as Realistic Person)

नक्षत्रों को ज्योतिषशास्त्र की रीढ़ कहा जा सकता है। किसी भी व्यक्ति का व्यक्तित्व, उसका स्वभाव एवं जीवनशैली कैसी होगी यह जन्म नक्षत्र से ज्ञात किया जा सकता है। किसी व्यक्ति का जन्म नक्षत्र वह होता है जिस नक्षत्र में जन्म के समय चन्द्रमा निवास करता है। इससे राशि का भी निर्धारण होता है क्योंकि हर नक्षत्र की अपने राशि होती है, बात करें उत्तराभाद्रपद नक्षत्र की तो इसके चारों चरण मीन राशि में होते हैं। इस राशि का स्वामी गुरू होता है व नक्षत्र स्वामी शनि होता है (Saturn is the lord of Uttra_Bhadrapada Nakshatra and Jupiter is the Lord of his sign)। जो व्यक्ति इस नक्षत्र में पैदा होते हैं उनपर इन सभी कारकों का प्रभाव होता है। आइये देखें कि इनका व्यक्ति के जीवन पर क्या प्रभाव होता है। ...
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