वैदिक ज्योतिष
सोलहवां नक्षत्र है विशाखा नक्षत्र (Vishakha Nakshatra is the 16th Nakshatra)
विशाखा नक्षत्र को नक्षत्र मंडल में 16 वां स्थान प्राप्त है। इस नक्षत्र को त्रिपाद नक्षत्र कहते हैं क्योंकि इसके तीन चरण तुला राशि में होते हैं और अंतिम चरण वृश्चिक में। इसका रंग सुनहरा होता है।
अनुराधा नक्षत्र के जातक अनुभवी एवं सिद्धांतवादी होते हैं। (The Native of Anuradha Nakshatra are Experienced and Ideological)
अनुराधा नक्षत्र को नक्षत्र मंडल में 17वां स्थान प्राप्त है। इसे शुभ नक्षत्र के रूप में शुमार किया जाता है। इस नक्षत्र का स्वामी शनि ग्रह है। और इस नक्षत्र की राशि वृश्चिक है और इस राशि का स्वामी मंगल कहलता है। इस नक्षत्र के स्वामी और राशि के स्वामी में वैर भाव होता है। इस स्थिति का जातक पर क्या प्रभाव होता है और उसका व्यक्तित्व एवं स्वभाव कैसा होता है आइये इसे देखें:...हिम्मती होते हैं, शतभिषा नक्षत्र के जातक (Native of Satvisha Nakshatra known as daring Personality)
शतभिषा नक्षत्र नक्षत्र मंडल में 24 वां नक्षत्र है (Satvisha Nakshatra is the 24th Nakshatra in the group of Constellation)। इस नक्षत्र को शुभ माना जाता है। इस नक्षत्र का आकार चक्र के समान है जिसके बीच का हिस्सा ढ़का हुआ प्रतीत होता है। इस नक्षत्र का स्वामी राहु होता है(Rahu is the lord of pf satv। ...परोपकारी होते हैं पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के जातक। (Native of Purvabhadrapada Nakshatra are Philanthropic)
नक्षत्रों की दुनियां में पूर्वाभाद्रपद का स्थान 25वां हैं (Purvabhadrapada is the 25rd Nakshatra in the group of 27 Constellation)। इस नक्षत्र के स्वामी बृहस्पति यानी गुरू होते हैं (Jupiter is the lord of Purvabhadrapada)। इस नक्षत्र का एक चरण मीन में होता है और तीन चरण कुम्भ में रहता है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव व्यक्तित्व एवं उनकी जीवनशैली कैसी होती है आइये इस पर विचार करें। ...पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के जातक (Native of Purvafalguni Nakshatra)
नक्षत्रमंडल में मौजूद 27 नक्षत्रों में पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र ग्यारहवां है(Purvaphalguni is Eleventh Nakshatra of constellation)। इसे सुअक्षि नक्षत्र भी कहा जाता है, इस नक्षत्र का रंग हल्का कत्थई होता है। पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी शुक्र होता है (Venus is the lord of Pruvapalguni Nakshatra )। यह सिंह राशि का नक्षत्र कहलता है (Purvafalguni Nakshatra is related to Zodiac sign Leo)। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति के बारे में ज्योतिषशास्त्र क्या कहता है आइये इसे देखें। ...अपनी बुद्धि से बनते हैं धनवान हस्त नक्षत्र के जातक (Hasta Nakshatra natives get rich by their inteligence)
भमंडल में विचरण करने वाले नक्षत्रों में हस्त नक्षत्र (Hasta Nakshatra ) का स्थान तेरहवां है। इस नक्षत्र का स्वामी चन्द्रमा है। और इस नक्षत्र की राशि कन्या है। ज्योतिषशास्त्र कहता है जो व्यक्ति जिस नक्षत्र में जन्म लेता है उस पर जीवन भर उस नक्षत्र और उस नक्षत्र की राशि का प्रभाव रहता है। ज्योतिष के इस सिद्धांत पर और भी जानकारी लेते हैं और देखते हैं कि हस्त नक्षत्र (Hast Nakshatra ) में पैदा लेने वाले व्यक्ति पर इस नक्षत्र और राशि का क्या प्रभाव होता है। ...ज्येष्ठा नक्षत्र के जातक का व्यक्तित्व (Personality of Native in Jyestha Nakshatra)
ज्येष्ठा नक्षत्र को अशुभ नक्षत्रों की श्रेणी में रखा गया है क्योंकि यह गण्डमूल नक्षत्रों में शुमार किया जाता है। इस नक्षत्र का स्वामी बुध को माना जाता है और इसकी राशि वृश्चिक होती है। मंगल इस राशि का स्वामी होता है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति पर उपरोक्त स्थिति का क्या प्रभाव होता है और इससे व्यक्ति के स्वभाव एवं व्यक्तित्व पर क्या प्रभाव होता है आइये इसे समझते हैं। ...आशावादी होते हैं पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के जातक (Native of Purvasadha Nakshatra are Optimistic)
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र को शुभ नक्षत्रों में गिना जाता है। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र होता है व इसकी राशि धनु होती है (Venus is the lord of Purvasadha and Sagittarius is the sign of this Nakshatra)। गुरू इस राशि का स्वामी होता है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति पर उपरोक्त स्थिति का क्या प्रभाव होता है, व्यक्ति का व्यवहार और स्वभाव कैसा होता है आइये इसे जानें।...भरोसेमंद होते हैं रेवती नक्षत्र के जातक। (Native of Revti Nakshatra known as faithful & honest Person)
नक्षत्र मंडल में रेवती का स्थान 27 वां हैं (Revti is the 27th Nakshatra in the group of Constellation)। यह आखिरी नक्षत्र माना जाता है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति के विषय में ज्योतिषशास्त्र क्या कहता है आइये इसकी जानकारी प्राप्त करें। ...मिलनसार एवं कोमल हृदय के होते हैं पुनर्वसु के जातक(Native of Punarvashu Nakshatra are Soft hearted & affable)
पुनर्वसु नक्षत्र को सातवां नक्षत्र माना जाता है(Punarvashu is seventh Nakshatra in constellation)। इस नक्षत्र के चारों चरणों में मिथुन राशि होता है। इस नक्षत्र का स्वामी गुरू को माना जाता है (Jupiter is the lord of Punarvashu Nakshartra)। देवमाता अदिति इस नक्षत्र की देवी मानी जाती हैं। बाल्मीकि रामायण के अनुसार भगवान राम का जन्म इसी नक्षत्र में हुआ था (Lord Rama was born in Punarvashu Nakshatra)।...खुशहाल और सुखमय जीवन जीते हैं चित्रा नक्षत्र के जातक! (Native of Chitra Nakshatra Enjoy happy and Prosperous life)
चित्रा नक्षत्र की गिनती शुभ नक्षत्रों में की जाती है। आकाशमंडल में इस नक्षत्र का स्थान चौदहवां है( Chitra is the fourteenth Nakshatra)। इस नक्षत्र का स्वमी मंगल ग्रह होता है(Lord of chitra is Mars)। इस नक्षत्र के दो चरण कन्या राशि में होते हैं और दो तुला राशि में। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार इस नक्षत्र का रंग काला होता है। ...स्वाति नक्षत्र के जातक मोती के समान चमकते हैं (The Native of Swati Nakshatra are shining like a pearl)
स्वाति नक्षत्र का स्वरूप मोती के समान है (Swati nakshtra looks like a pearl)। इसे शुभ नक्षत्रों में गिना जाता है। इस नक्षत्र के विषय में मान्यता है कि, इस नक्षत्र के दौरान जब वर्षा की बूंदें मोती के मुख में पड़ती है तब सच्चा मोती बनता है, बांस में इसकी बूंदे पड़े तो---------...दुर्भाग्यशाली नहीं होते मूल नक्षत्र के जातक (Native of Mool Nakshatra are not unfortunate)
मूल नक्षत्र गण्डमूल नक्षत्र के अन्तर्गत आता है। यह नक्षत्र बहुत ही अशुभ माना जाता है। इस नक्षत्र का स्वामी केतु होता है। इस नक्षत्र के चारों चरण धनु राशि में होते हैं। इस नक्षत्र के विषय में यह धारणा है कि जो व्यक्ति इस नक्षत्र में जन्म लेते हैं उनके परिवार के सदस्यों को इसके दोष का सामना करना पड़ता है। दोष पर विशेष चिन्ता करने की आवश्यकता नहीं है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति में कई गुण होते हैं, हमें इन गुणों पर ही अपना ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। ...पुष्य नक्षत्र के जातक परिपक्व होते हैं (Native of Pushya Nakshatra are Mature)
आकाश में विचरने वाले नक्षत्र जिनकी कुल संख्या 27 होती है (Nakshatras are twenty seven)। ये किसी न किसी रूप में हमारे जीवन पर अपना प्रभाव रखते है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार गोचर में नक्षत्र भ्रमण करते हैं और यह क्रम अनवरत रूप से चलता रहता है। इस क्रम में हमारे जन्म के समय जो नक्षत्र मौजूद होता है उसका प्रभाव हमारे जीवन में जन्म से लेकर मृत्यु तक बना रहता है। बात करें पुष्य नक्षत्र की तो यह नक्षत्रों की गणना में आठवें स्थान पर आता है(Pushya is eighth Nakshatra in constellation)।...राजनीति में पारंगत होते हैं आर्दा नक्षत्र के जातक (Native of Ardra Nakshatra are Expert in Politics)
नभमंडल में विराजमान नक्षत्रों में आर्द्रा का स्थान छठा है (Ardra is sixth Nakshatra of constellation) । ज्योतिषशास्त्री कहते हैं ज्योतिषशास्त्र के नियमानुसार जिस जातक का जन्म जिस नक्षत्र में होता है, उस नक्षत्र के स्वामी का प्रभाव उसके जीवन, उसके व्यवहार और स्वभाव पर देखा जाता है। आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी राहु को माना जाता है (Rahu is the ruler of Ardara Nakshatra) ।...अश्विनी नक्षत्र का व्यक्तित्व पर प्रभाव(Ashwani Nakshatra)
ज्योतिषशास्त्र के अन्तर्गत बताया गया है कि नक्षत्रों की कुल संख्या 27 है विशेष परिस्थिति में अभिजीत को लेकर इनकी संख्या 28 हो जाती है (Nakshatras are 27. In special condition they are 28 including Abhijeet Nakshatra.)।...भावुक और संवदेनशील होते हैं रोहिणी नक्षत्र के जातक (Native of Rohini Nakshatra are Emotional and Sensitive)
हम सभी जानते हैं कि नक्षत्रों का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव होता है। नक्षत्रों के प्रभाव से हमारा सम्पूर्ण व्यक्तित्व और हमारी जीवन शैली प्रभावित होती है। ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि हमारे जन्म के समय जो नक्षत्र होता है अर्थात जिस नक्षत्र में हमारा जन्म होता है उस नक्षत्र का हमारे व्यक्तित्व, व्यवहार एवं आचार विचार पर महत्वपूर्ण प्रभाव होता है (The Nakshatra we are born in, has an impact on our life)...पहली नज़र के प्यार पर नहीं करते ऐतबार कृतिका नक्षत्र के जातक (Native of Kritika Nakshatra dosen't believe in love at first sight)
ज्योतिषशास्त्र में नक्षत्रों को काफी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है (Nakshatras are very important in Astrology)। जब भी किसी व्यक्ति के जीवन के सम्बन्ध में कोई भविष्यवाणी करनी होती है तब ग्रह स्थिति, राशि आदि के साथ नक्षत्रों का भी आंकलन किया जाता है। नक्षत्र न केवल भविष्य को दर्शाते हैं वरन इंसान के व्यक्तित्व को भी उजागर करते है (Nakshatra not only predict they also reveal the nature of their native)।...बहादुर होते हैं मृगशिरा नक्षत्र के जातक (Native of Mrigashira Nakshatras are brave)
वैदिक ज्योतिष में मूल रूप से 27 नक्षत्रों का जिक्र किया गया है। नक्षत्रों के गणना क्रम में मृगशिरा नक्षत्र का स्थान पांचवां है (Mrigashira is the fifth Nakshatra of constellation)। इस नक्षत्र पर मंगल का प्रभाव रहता है क्योंकि इस नक्षत्र का स्वामी मंगल होता है (Mars is Lord of Mrigasira Nakshatra)। ...स्थायित्व में यकीन रखते हैं उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के जातक। (Natives of Uttaraphalguni Nakshatra believes in stability)
नक्षत्र मंडल में उत्तराफाल्गुनी 12 वां नक्षत्र होता है (Uttraphalguni is the twelfth nakshatra)। इस नक्षत्र के स्वामी सूर्य होते हैं (Sun is the lord of Uttarafalguni Nakshatra)। यह नक्षत्र नीले रंग का होता है। ...आश्लेषा नक्षत्र के जातक (Native of Ashlesha Nakshatra)
नक्षत्रों की गणना के क्रम में आश्लेषा नक्षत्र नवम स्थान पर आता है(Aslesha is the ninth nakshatra)। यह नक्षत्र कर्क राशि के अन्तर्गत आता है (Aslesha Nakshatra is related to cancer)। इस नक्षत्र का स्वामी बुध होता है(Mercury is the lord of Aslesha Nakshatra)। इस नक्षत्र को अशुभ नक्षत्र की श्रेणी में रखा गया है क्योंकि यह गण्डमूल नक्षत्र के अन्तर्गत आता है। इस नक्षत्र में पैदा लेने वाले व्यक्ति गण्डमूल नक्षत्र से प्रभावित होते हैं। ...अश्विनी नक्षत्र का व्यक्तित्व पर प्रभाव(Ashvini Nakshatras effect on Personality)
ज्योतिषशास्त्र के अन्तर्गत बताया गया है कि नक्षत्रों की कुल संख्या 27 है विशेष परिस्थिति में अभिजीत को लेकर इनकी संख्या 28 हो जाती है। गोचरवश नक्षत्र दिवस परिवर्तित होता रहता है। ज्योतिष सिद्धान्त के अनुसार हर नक्षत्र का अपना प्रभाव होता है(As per aspects of Astrology each nakshatras have it own Effects) । जिस नक्षत्र में व्यक्ति का जन्म होता है उसके अनुरूप उसका व्यक्तित्व, व्यवहार और आचरण होता है। नक्षत्रों में सबसे पहला अश्विनी होता है(Ashvini is the first Nakshatras), इस नक्षत्र में जिनका जन्म होता है वे कैसे होते हैं आइये इसे जानें: ...मघा नक्षत्र के जातक का व्यक्तित्व (Know the Personality of Magha Nakshatra's Native)
नक्षत्र मंडल में मघा नक्षत्र गिनती में दसवें स्थान पर आता है (magha nakshatra is tenth nakshatra of Constellation group)। मघा नक्षत्र को भी गण्डमूल नक्षत्र की श्रेणी में रखा गया है। मघा नक्षत्र का स्वामी केतु को माना जाता है (Ketu is the lord of Magha Nakshatra)। इस नक्षत्र के चारों पद सिंह राशि में आते हैं इसलिए सूर्य का प्रभाव भी इस नक्षत्र के जातक पर रहता है क्योंकि राशि का स्वामी सूर्य होता है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति पर नक्षत्र का क्या प्रभाव रहता है और इस प्रभाव के कारण व्यक्ति का स्वभाव, व्यक्तित्व और व्यवहार कैसा होता है आइये देखें:...रात और दिन का व्यक्तित्व पर प्रभाव (Effects of day and night on our personality)
एक दिन में 24 घंटे होते हैं और इन 24 घंटों में घड़ी की सूई रात और दिन का सफर तय करती है। आमतौर पर देखा जाय तो रात और दिन में मुख्य अंतर यह होता है कि दिन के वक्त सूर्य देव अपनी किरणों के साथ धरती को अपने तेज से रौशन करते हैं और रात्रि के वक्त चन्द्रमा की झिलमिलाती रोशनी अंधेरे में उम्मीद की लौ लिये नई सुबह और नई आशाओं का संदेश देती है। यह तो रही आम बातें, लेकिन ज्योतिष सिद्धान्त के अनुसार देखें तो दिन और रात हमारे स्वभाव और प्रकृति पर भी प्रभाव डालते हैं। आप जानना चाहेंगे कैसे तो, आइये देखें.....। ...योनिफल (Yoniphal)
धर्म ग्रंथों में बताया गया है कि इस ब्रह्माण्ड में कुल 84 लाख योनियां हैं( In Mythological books there are 84 lakh yoniyaa in our Universe) , अर्थात संसार में इतने प्रकार के प्राणी मौजूद हैं। मनुष्य योनि को इन सभी योनियों का मध्य माना जाता है। ज्योतिषशास्त्र कहता है कि हम भले ही मनुष्य योनि में जन्म लें लेकिन जिस नक्षत्र में हमारा जन्म होता है हम पर उस नक्षत्र की योनि का प्रभाव पड़ता है(As per our Aistrology if we are birth in Manushay yoni but our life efected according to the Birth Nakshatras) । नक्षत्र की योनि के प्रभाव से हमारा स्वभाव, व्यवहार और व्यक्तित्व भी प्रभावित होता है(Nakshatras are also effected our Nature,Character and personality)। आइये देखते हैं कि किस योनि में व्यक्ति का स्वभाव और व्यक्तित्व कैसा होता है। ...वारों का स्वभाव पर प्रभाव (Effect of Weekday on Temperament)
सप्ताह में कुल सात दिन या सात वार होते है. हम सभी लोगों का जन्म इन सातों वारों में से किसी एक वार को हुआ है। ज्योतिषशास्त्री कहते हैं, वार का हमारे व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव पड़ता है. हमारा जन्म जिस वार में होता है उस वार के प्रभाव से हमारा व्यवहार और चरित्र भी प्रभावित होता है. आइये देखें कि किस वार में जन्म लेने पर व्यक्ति का स्वभाव कैसा होता है. ...भरणी नक्षत्र के जातक का व्यक्तित्व(Effect of Bharani Nakshatras on Person Personality)
जैसा कि हम जानते हैं हमारा सम्पूर्ण व्यक्तित्व राशि, ग्रह, लग्न, नक्षत्र आदि से प्रभावित होता। इन सभी के प्रभाव से(We are usualy knows that our whol Personality depend on Rashi,Planets,Ascendent and Nakshatras) हमारा व्यक्तित्व निर्मित होता है। यहां हम बात करते हैं कि भिन्न भिन्न नक्षत्रों द्वारा हमारा व्यक्तित्व कैसे निर्घारित होता है। "व्यक्तित्व और नक्षत्र की कड़ी" में हम गणना क्रम में दूसरे स्थान पर विराजमान भरणी नक्षत्र के विषय में आइये बात करें। ...व्यक्ति के चरित्र और स्वभाव पर जन्मतिथि का प्रभाव पार्ट-1 (impact of birth date part-1 )
प्रतिपदा(pratipda) से लेकर अमावस(Amavas) तक तिथियों का एक चक्र होता है जैसे अंग्रेजी तिथि में 1 से 30 या 31 तारीख का चक्र होता है। ज्योतिषशास्त्र में सभी तिथियों का अपना महत्व है(As per Aistrology all dates have own Importance)। सभी तिथि अपने आप में विशिष्ट होती है। हमारे स्वभाव और व्यवहार पर तिथियों का काफी प्रभाव पड़ता है ऐसा ज्योतिषशास्त्री मानते हैं। हमारा जन्म जिस तिथि में होता है उसके अनुसार हमारा स्वभाव होता है(Our nature according to our Date of Birth)। आइये तिथिवार व्यक्ति के स्वभाव के विषय में जानकारी प्राप्त करें। ...जन्म पक्ष का व्यक्तित्व पर प्रभाव (Impact of Janma paksha on personality)
रोजमर्रा की जिन्दग़ी में हम कई लोगों से मिलते हैं और पाते हैं कि हर दूसरे व्यक्ति के स्वाभाव में कुछ न कुछ अंतर होता है। स्वभाव में अंतर कई कारणों से हो सकता है जैसे परिवेश, जीवन शैली आदि। अगर हम ज्योतिष की दृष्टि से देखें तो व्यक्ति के स्वभाव में अंतर उनकी कुण्डली में स्थित ग्रह(Man Nature are different according to Palnet situated in Kundli), राशि और नक्षत्र (Nakshatra and Rashi) से होता है । ज्योतिषशास्त्री मानते हैं कि स्वभाव में अंतर का कारण जन्म पक्ष भी होता है। व्यक्ति का जन्म जिस पक्ष में होता है उसके अनुसार व्यक्ति के स्वभाव में परिवर्तन देखा जाता है। ...ज्योतिष की विभिन्न शाखाएं ( VARIOUS BRANCHES OF JYOTISH)
ज्योतिष का अर्थ होता है ज्योति दिखाना अर्थात अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाना. अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाली यह विद्या अत्यंत गूढ़ और रहस्यमयी है. इस विद्या को पराविद्या भी कह सकते हैं क्योंकि यह इस लोक से परलोक तक की जानकारी प्रदान करने वाली एवं भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों कालों पर प्रकाश डालने वाली विद्या है.हम आप जब इस धरती पर जन्म लेते है तब अपने साथ अपनी किस्मत और अपना भाग्य लेकर पैदा होते हैं विधाता पटकथा लेखक की तरह हमारे जीवन रूपी नाटक का हर दृश्य लिखकर हमें दुनियां में अपना चरित्र निभाने हेतु भेज देता है. ...- आपकी कुंडली में शुभ योग (Shubh Yoga in your Kundli)
- दैनिक - ज्योतिष (Daily Astrology) - Hindi Rashifal
- हस्तरेखा से जानिए अपना भाग्य (Know your fortune through Palmistry)
- कालसर्प योग (Kal Sarp Dosha) भी शुभ फल देता है
- तुला राशि के लिए वर्ष 2010 (2010 Horoscope Forecast for Tula Rashi)
when i am having putra yog
my dob is 4.8.80 at 2.40pm in bilaspur[cg] i get married 1 year ago i want to know that when will i get child. please ...
meri shaadi kab hogi ? aur love hogi ya arrange marriage?
DOB: 28TH August 1977
TIME: Near about 9:20 AM
DAY: Sunday
PLACE : ...
mai naukri kab paunga aur mere shadi us ladki se hoge ya nahi jisse mai chahta hu
dob----13-03-1991
time---07.00am
citu---gorakhapur(u.p)
meri dob. 8.oct.1992 plz bataiye sadi kab hogi love hogi ya aarang..
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