Newsletter
Email:
Home | वैदिक ज्योतिष

वैदिक ज्योतिष

ग्रहो की युति का प्रभाव (The impact of planetary conjunction)

जब किसी दर्शक तथा शरीर (ग्रह) के मध्य कोई दूसरा भारी शरीर (ग्रह) आ जाता है तो उस भारी वस्तु के कारण पहले वाली बस्तु (ग्रह) का प्रकाश दर्शक (व्यक्ति) तक नही पहुँच पाता तो उसे ग्रहण (eclipse) लग गया है, ऎसा खगोल बिज्ञान में कहा जाता है.
Full story
image

अस्त भावस्वामी का फलादेश (The result of combust house lord)

कुण्डली और गोचर में जब ग्रह अस्त होता (Planetary combustion in the transit or in the chart) है तो उसका क्या परिणाम होता हे इसी को प्रत्येक भावानुसार दर्शाया गया है. ...
Full story
image

पंचाग के अंग - करण (Part Of Panchang-Karan)

करण तिथि (Karan Tithi) का आधा भाग होता है. तिथि के पूर्वार्द्ध (Purvardha) अर्थात पहले आधे भाग में एक करण....
Full story
image

पंचाग के अंग - नक्षत्र (Part Of Panchang- Nakshatra)

ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्र(27 Nakshatras) मान्य है. 360º के भचक्र को समान 27 भागों में विभाजित करने पर प्रत्येक भाग का मान 13º-20' आता है. एक नक्षत्र सामान्यतय 24 घंटो तक रहता है. परन्तु कभी-कभी 13º-20' पार करने में नक्षत्र कम या अधिक समय भी ले लेता है. चन्द्रमा को जो समय 13º-20' पार करने में लगता है उसे नक्षत्र कहते हैं. सवा दो नक्षत्रो की एक चन्द्र राशी (One Moon Rashi of Nakshatra) होती है. ...
Full story
image

पंचाग के अंग - योग (Part Of Panchang And Yog)

जब सूर्य और चन्द्रमा की गति में 13º-20' का अन्तर पड्ता है तो एक योग (Yog) होता है. योग संख्या (Yog Sankshya) में कुल (Kula) 27 होते हैं आकाश की स्थिति(Position Of Akash) से इन योगो का कोइ सम्बन्ध नहीं है. वैसे भी योगो की आवश्यकता यात्रा, मुहुर्त इत्यादि प्रकरण (Prakarana) में पडती है. ...
Full story
image

पंचाग के अंग - तिथि (Part Of Panchang And Tithi)

पाँच अंगो के मिलने से पंचाग बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं:- ...
Full story
image

कालसर्प योग (Kalsarpa Yog) व मंगलीक दोष (Manglik Dosh) का भय

एक कहावत है कि संसार में उसी वस्तु की नकल होती है जिसकी माँग (Demand) अधिक होती है. प्राचीन समय में ज्योतिष केवल आवश्यकता थी परन्तु आज के दौर में आवश्यकता के साथ-साथ ज्योतिष एक फैशन भी बन गया है. ज्योतिष का अर्थ है 'ज्योति दिखलाना'. मनुष्य के जीवन में लाभ-हानि, अनुकूलता-प्रतिकूलता, शुभता-अशुभता या अच्छा-बुरा कब-कब होगा इसको ज्योतिष के माध्यम से ही जाना जा सकता है....
Full story
image

जन्मकुण्डली का निर्माण कैसे करें (How To Make Birth Chart)

किसी भी बच्चे या व्यक्ति की जन्मकुण्डली का निर्माण करने के लिए तीन Factors की आवश्यकता पड्ती है. 1) जन्मतिथि (Date of Birth) 2) जन्मसमय (Time of Birth) 3) जन्मस्थान (Place of Birth) ...
Full story
image

वर्षकुण्डली (Year Chart)

जातक/जातिका (Native) के नये वर्ष में प्रवेश करने पर वर्षकुण्डली का निर्माण किया जाता है. जन्म समय जो भी लग्न (Lagna at the time of birth) आये परन्तु प्रत्येक वर्ष जन्म तिथि (Birth Tithi) पर लग्न बदल जाता है लगभग दो लग्नो का अन्तर पड् जाता है, क्या यह युक्तिसंगत है, ...
Full story
image

नवीन पद्वति द्वारा जन्मकुण्डली का निर्माण (New Method Of Making Birth Chart)

नवीन पद्वति द्वारा इष्टकालिक लग्न राशी (Lagna Rashi) जानने के लिए इष्टकालिक (Estakalik) साम्पत्तिक काल की आवश्यकता होती है. साम्पत्तिक काल साधन (Kal Sadhan) के लिए स्थानीय मध्य काल (Local Mean Time) के बारे में ज्ञात होना जरुरी है. किसी भी देश के Standard Time को L.M.T. में बदलने के लिए उस देश के (Standard Time Meridian) की आवश्यकता होती है. किसी भी देश के रेखांश (Longitude) को उस देश का (Standard Time) कहते हैं, जैसे कि भारत का Standard Time (IST) 82º-30' (पूर्व) रेखांश है. ...
Full story
image

वशीकरण (Bewitchment)

आजकल आप समाचार पत्र/ पत्रिकाओं में ऎसे बहुत से भ्रामक व झूठे विज्ञापन देखते/ पढ्ते होंगे जिनमें अक्सर लिखा होता है कि मनचाहा वशीकरण (Vashikaran) करायें तथा 6/12/24 घंटों में परिणाम देखें. इस विज्ञापन की भाषा से ही आप समझ सकते हैं कि इस महाशय ने दुनिया को मूर्ख समझकर कितना बडा झूठ बोला है. यह तन्त्र विद्या (Occult Science) के नाम का सरासर दुरुपयोग है. देवो ने जो भी विद्या मानव जाति को प्रदान की है वो उनकी भलाई के लिए है न कि दूसरो का बरा करने के लिए . ...
Full story

गणित (गणना) द्वारा जन्मपत्री का निर्माण (Birth Chart On the Basis Of Mathematical Calculations)

स्वंय जन्मपत्री का निर्माण करने के लिए आपको पंचाग (Panchanga) की आवश्यकता पडेगी, इसके साथ ही एक सटीक (प्रामाणिक) ऎटलस भी आपके पास होना चाहिये जिसमें विश्व के सभी प्रमुख शहरों के अक्षांस व रेखांश (Latitude/ Longitude) दिये रहते हैं. आमतौर पर लगभग सभी पंचागो में भारत के सभी प्रमुख शहरों के अक्षांस रेखांश व IST (भारतीय स्टैडर्ड टाइम) से उस शहर (प्रत्येक शहर) का समय में अन्तर भी दिया रहता है. जिसमें + की गणना करके उस शहर का वास्तविक समय ज्ञात किया जा सकता है. आइये दिल्ली मे़ जन्मे बालक की जन्मपत्री का निर्माण करते हैं. ...
Full story

यदि ग्रह कमजोर है तो उसे चार्ज (शक्तिवान) करें? ( Enhancement Of Power of Weak Planets)

जन्मकुण्डली में जब कोइ ग्रह कमजोर होता है तो उस ग्रह के शुभ फल देने की क्षमता में कमी आ जाती है. उस कमजोर ग्रह (Weak Planet) को बलवान बनाने के लिए (चार्ज करने के लिए) (Empowerment) ज्योतिष शास्त्र में बहुत सारे उपाय दिये गये हैं. प्रत्येक व्यक्ति अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार इन उपायों से लाभ ले सकता है. निम्न उपायों का ब्योरा इस प्रकार से है:- ...
Full story
image

प्रश्नकुण्डली में लग्न का सिद्धान्त (Principles of Lagna In Prasna Kundali)

सम्पूर्ण 12 लग्नो (Twelve Lagnas) को तीन श्रेणियो में बाँटा गया है. 1) चर लग्न (Charan Lagna) - मेष, कर्क, तुला, मकर (1,4,7,10) 2) द्विस्व भाव (Dual Nature) - मिथुन, कन्या, धनु, मीन (3,6,9,12) 3) स्थिर लग्न (Sthir Lagna) - वृष, सिंह, वृ्श्चिक , कुम्भ (2,5,8,11) ...
Full story
image

मुख्य अशुभ योग (Main Malefic Yog)

जन्मकुण्डली में ग्रहो की अशुभ स्थिति होने पर एंव उनका आपस में या भाव के साथ सम्बन्ध स्थापित करने पर अशुभ योग (Inauspicious Yog) का निर्माण होता है. मुख्य अशुभ योग इस प्रकार से है. ...
Full story
image

जन्मकुण्डली सही होने के बावजूद फलादेश सही क्यों नही होता - एक चिन्तन-1 (Why Wrong Predictions Inspite of Correct Birth Chart)

आजकल प्रायः देखने सुनने मे आता है कि विद्वान ज्योतिर्वेदो या कम्प्यूटर द्वारा बनी सही जन्मकुण्डली का फलादेश (Phaladesh) करने में बडे-बडे विद्वान एंव गणितज्ञ मात खा जाते हैं और फिर स्वंय को सही सिद्ध करने कि लिए कहते हैं कि जन्मकुण्डली गलत बनी है तथा इसमें (Retification of Chart) करने की आवश्यकता है. परन्तु वास्तविकता यह नहीं है, यद्यपि गणित और फलित दोनों ही ज्योतिष के अंग है फिर भी पश्चिमी देशो का गणित वैदिक पद्वति के गणित से उत्तम होने के बावजूद सही फलादेश करने में विफल (Substitute Of Prediction) क्यों है, इसके वास्तविक कारण पर हम प्रकाश डालेंगे. ...
Full story
image

निराकरण ज्योतिष में सबसे उपयुक्त विधि (Suitable Methods of Remedial Astrology)

वैदिक ज्योतिष के तीन खण्डो में से तृ्तीय खण्ड निराकरण ज्योतिष (Remediaal Astrology) कहलाता है. ज्योतिष के द्वितीय खण्ड फलित ज्योतिष (Phalit Jyotish) से हमें अपने भाग्य के बारे में जानकारी उपलब्ध हो जाती है, परन्तु ग्रहो के अशुभ प्रभाव (Malefic Influence) को दूर करने का साधन निराकरण ज्योतिष के अन्तर्गत आता है. सबसे पहले साधारण ज्योतिषियो द्वारा बताये जाने वाले उपायो की जानकारी दी जायेगी. ...
Full story
image

फलित ज्योतिष में गण्डमूल नक्षत्रो का प्रभाव (Impact Of Gandamul Nakshatra on Phalit Jyotish)

नक्षत्रो की कुल संख्या (Kula Sankhya of Nakshatra) 27 होती है, जिनमें से 6 नक्षत्र गण्डमूल कहलाते(Six- Gandamula Nakshatra) हैं,...
Full story
image

अयंनाश (Ayanamsh)

अंग्रेजी सिस्टम में अयंनाश (Ayanamsh) होता है, इसीलिए उसे सायन सिस्टम के रुप में जाना जाता है. भारतीय सिस्टम में अयंनाश (Indian System of Ayanamsh) नही होता इसीलिए उसे निरायण सिस्टम के रुप में जाना जाता है. ये दोनो सिस्टम पूरे विश्व में बहुत ही प्रसिद्ध है. ...
Full story
image

ज्योतिष की नाम पर गोरख धन्धा (Enigma In The Name Of Astrology)

ज्योतिष का प्रभाव वैदिक काल (Vedic Kal) से ही रहा है. वैदिक युग में मानव ने ज्योतिष सहित प्रत्येक ज्ञान को आम जन की भलाई के लिए ही प्रयोग किया. कुछ आसुरी प्रवृत्ति के लोगो ने इस ज्ञान का दुरुपयोग किया तो वे राक्षस कहलाये. स्वभाववश सभ मनुष्य सुख-शान्ति एंव आनन्द प्राप्त करना चाहते हैं. इन सबकी प्राप्ति को सुलभ बनाने हेतु ही परमात्मा ने हमें ज्ञान के रुप में सर्वोत्त्म उपहार दिया है. जीवन में तीन चीजें होती हैं:- ...
Full story
image

क्या सूर्य, मंगल, शनि, राहु-केतु अशुभ ग्रह है?(Are Sun, Mars, Saturn, Rahu And Ketu Malefic Planets?)

ज्योतिष ग्रन्थो में नवग्रहो (Nav Grahas) को दो श्रेणियो में बाँटा गया है. शुभ ग्रह जैसे कि चन्द्रमा, बुध, गुरु एंव शुक्र तथा पापी ग्रह (Malefic Planets) सूर्य, मंगल, शनि, राहु और केतु. शुभ ग्रह का अर्थ है, वो ग्रह जो शुभ फल प्रदान करते हैं तथा अशुभ फल देने वाले ग्रह अशुभ् कहलाते हैं. एक प्रश्न जो चिन्तन में उभरता है कि क्या अशुभ् कहे जाने वाले ग्रह सदा हानि ही करते है. और यदि लाभ भी देते हैं तो उनको अशुभ् क्यो कहा जाता है. लेखक ने इस प्रश्न का उत्तर अपने अनुभवो के आधार पर इस आलेख में देने का प्रयास किया है. ...
Full story
image

क्या ग्रह अस्त होने पर प्रभावहीन हो जाता है? (Does Combustion Influence The Planets)

ज्योतिष शास्त्रो में सामान्य तौर पर ऎसा माना जाता है कि ग्रह अस्त (Combustion of Planets) होने के बाद अपना प्रभाव खो देता है. अर्थात वह निष्फल हो जाता है. तार्किक दृष्टि से तो यह सिद्धान्त सही प्रतीत होता है परन्तु व्यवहारिक दृष्टि से भी क्या यह सही है इसकी विवेचना हम इस लेख के माध्यम से करेंगे. लेखक की मान्यता है कि यदि ग्रह फल देने में एकदम प्रभावहीन हो जाये तो जन्मकुण्डली में उस ग्रह विशेष की उपस्थिति का कोइ अर्थ ही नहीं. कोइ ग्रह अस्त होने पर कमजोर हो सकता है, कडे परिश्रम के उपरान्त फल देगा यह हो सकता है (रुकावटो के पश्चात फल देगा) तथा पूर्ण फल(Purna Phala) न देकर आधा-अधूरा (श्रम के अनुसार)फल प्रदान करेगा. यहाँ एक बात और विशेष रुप से ध्यान देने की है कि यदि अस्त होने वाला ग्रह सूर्य का मित्र हो तो कम हानि और यदि शत्रु हो तो अधिक हानि करेगा. ...
Full story
image

प्राचीन एंव नवीन फलादेश के दृष्टिकोण में अन्तर(भिन्न्ता) (Difference Between Ancient & Modern Attitude of Prediction)

प्राचीन समय में ऋषियो ने फलादेश (Phaladesh) करने के कुछ नियम बनाए थे परन्तु वर्तमान में एसा देखा गया है कि ग्रहो के फल में परिवर्तन आ गया है. फलित ज्योतिष (Phalit Jyotish) में प्राचीन आधार पर की गइ भविष्यवाणियाँ कुछ हद तक गलत साबित हुई है. उदाहरण के लिये सतयुग, द्वापर एंव त्रेतायुग में बृहस्पति ग्रह को बलवान माना जाता था इसका मुख्य कारण यह है कि वह दौर राजतन्त्र का था. बृहस्पति ग्रह राजतन्त्र का कारक है. कलयुग में लोकतान्त्रिक शासन की पद्वति चलती है तथा लोकतन्त्र का ग्रह शनि होने से वर्तमान दौर में शनि ग्रह को सबसे अधिक बलवान माना जाता है. ...
Full story
image

भारतीय एंव पाश्चात्य तिथियो में अंतर (Difference Between Indian And Western Tithis)

पाश्चात्य देशो में तिथि का प्रारम्भ रात्रि 12 बजे से होता है. तिथियो की संख्या अधिकतम 31 तक होती है. इनमें से फरवरी का महीना 28/29 दिनों का, जनवरी, मार्च, मई, जुलाई, अगस्त, अक्टूबर, व दिसम्बर के महीने 31 दिनो के तथा अप्रेल, जून, सितम्बर, व नवम्बर 30 दिनो के मास होते हैं. सम्पूर्ण विश्व में इसी कैलेण्डर को प्रामाणिक माना जाता है. सम्पूर्ण विश्व पर अंग्रेजो का साम्राज्य रहने से इस कैलेण्डर वर्ष को मान्यता प्राप्त हुई. ...
Full story
image

वैदिक ज्योतिष में अंशो का महत्व (Importance of Degrees In Vedic Jyotish)

वैदिक ज्योतिष का आधार गणित है। इस आधार पर गणितीय सिद्धांत से ज्योतिषशास्त्र को अलग नहीं किया जा सकता। ज्योतिषशास्त्र में जिन नियमों को अपनाया गया है उसके अनुसार सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को 360º यानी अंश माना गया है। इनमें कुल 12 राशिया होती हैं, प्रत्येक राशि के 30º होते हैं। 27 नक्षत्र (27 Nakshatras) होने से पत्येक नक्षत्र 13-20º का होता है।...
Full story
image

ग्रहो का बल (Power Of Planets)

किसी भी ग्रह का बल जानने के लिए यह आवश्यक है कि वो ग्रह अस्त, नीचस्थ (Debilitated) (वक्री न हो), शत्रु राशी (Zodiac Sign Of Enemy) में स्थित, तृतीय सहित त्रिक भावस्थ (6,8,12 एंव 3), शत्रु ग्रह (Malefic Planets) द्वारा युक्त एंव दृष्ट न हो तभी उस ग्रह के बल का विचार करना चाहिये. शास्त्रीय अनुमोदन एंव अब तक की परम्परा के अनुसार ग्रहो का बल षडबल के नाम से जाना जाता है, फिलहाल हम इसी को केन्द्र में रख कर इस पर चर्चा करेंगे. ये छः बल है, नैसर्गिक बल (Natural Power), कालबल (Kal Bal), स्थान बल (Sthan Bal), दिग्बल (Dig Bal), दृग्बल (Drig Bal), और चेष्टाबल (Chesta Bal) . ...
Full story
image

क्यों होती है भविष्यवाणी ग़लत? (Why are Pridictions Often untrue?)

अपूर्ण ज्योतिष ( Incomplete Astrology ) के आधार पर की गई भविष्यवाणी की सत्यता का प्रतिशत क्या होगा यह आप स्वयं समझ सकते हैं। इस प्रकार से की गई भविष्यवाणी सत्य भी हो सकती है और झूठी भी. आधी- अधूरी भविष्यवाणी क्या कारण है यहां हम इसकी चर्चा करने जा रहे हैं। ...
Full story
image

ज्योतिष ओर विज्ञान का आपस में सम्बन्ध ( Relationship Between Vedic Jyotish And Science)

प्रत्येक घटना का कोई आधार होता है. यहाँ पर कुछ सामान्य प्रश्न उठते हैं जैसे कि क्या ज्योतिष विज्ञान है ( Is astrology a science) ? ग्रह हमें किस प्रकार प्रभावित करते हैं? रत्न ओर अंगुठी कैसे हमारे भाग्य में परिवर्तन लाते है? तन्त्र विज्ञान का ज्योतिष में क्या योगदान है? क्या निराकरण ज्योतिष ( Remedial Astrology ) तथ्यपुर्ण है? बुद्धिजीवियों के साथ परिचर्चा में बहुत सारे प्रश्न सामने आते हैं. ...
Full story

ज्योतिष में मुख्य योग ( Main Yoga In Jyotish)

ज्योतिष में योग दो प्रकार से बनते हैं, एक तो सूर्य एंव चन्द्रमा के अंशो में दूरी होने पर, दूसरे ग्रहो के आपस में सम्बन्ध बनाने पर. द्वितीय प्रकार के योग महत्वपूर्ण एंव अधिक फलदायी होते हैं. ग्रहो से बनने वाले योग भी दो प्रकार के होते हैं. ...
Full story

ग्ण्डमूल नक्षत्र क्या होते हैं. (What are Gandamoola Nakshatras)

वैदिक ज्योतिष में नक्षत्र का बहुत महत्व होता है. नक्षत्र कुछ सितारों का समूह होता है जो अन्तरिक्ष में स्थिर अवस्था में है. नक्षत्र 27 होते हैं. प्रत्येक ग्रह अपने परिभ्रमन के दौरान नक्षत्रों से होकर ही गुजरता है. ग्रहो की संख्या 9 है तथा नक्षत्रो की 27 होने से प्रत्येक ग्रह तीन नक्षत्रो का स्वामीत्व स्वीकार करता है. जन्मकुण्डली में विंशोत्तरी दशा का आधार भी नक्षत्र ही है. जन्म समय चन्द्रमा कौन से नक्षत्र से गुजर रहा है, उसी नक्षत्र से महादशा प्रारम्भ होती है. ...
Full story
Featured author