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भविष्य कथन की विभिन्न पद्धतियां (The various systems for predicting the future)
भविष्य जानने की उत्सुकता हम सभी के मन में रहती है.अपनी इस उत्सुकता को शांत करने के लिए हम ज्योतिष की विभिन्न पद्धतियों का सहारा लेते हैं.भारत सहित विश्व के अन्य देशों में भविष्य कथन के लिये पद्धतियां हैं
इनकी अपनी अपनी विधि और विशोषताएं है.आइये हम इन्हीं पद्धियों के विषय में बात करें.वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology)
वैदिक ज्योतिष भारतीय ज्योतिष विधि में सबसे प्रमुख है.यह वेद का हिस्सा है जिसे वेद की आंखें भी कहते हैं.इसमें जन्म कुण्डली (Janmkundali) के आधार पर भविष्य कथन किया जाता है.इस विधि से भविष्य जानने के लिए जन्म समय, जन्मतिथि एवं जन्म स्थान का ज्ञान होना आवश्यक होता है.
जैमिनी पद्धति (Jaimini Astrology)
महर्षि पराशर और जैमिनी दोनों ही समकालीन थे.इन दोनों ऋषियों ने वैदिक ज्योतिष के आधार पर भविष्य आंकलन की नई विधि को जन्म दिया.जैमिनी पद्धति दक्षिण भारत में अधिक प्रचलित है.यह पद्धति वैदिक ज्योतिष से मिलती जुलती है परंतु इसके कुछ अपने सिद्धांत और नियम हैं.जो ज्योतिषशास्त्री जैमिनी और पराशरी ज्योतिष दोनों से मिलाकर भविष्य कथन करते हैं उन्हें परिणाम काफी सटीक मिलते हैं.
प्रश्न कुण्डली (Horary Astrology)
प्रश्न कुण्डली प्रश्न पर आधारित ज्योतिषीय विधि है.जिन्हें अपनी जन्मतिथि, समय और स्थान का ज्ञान नहीं होता उनके लिए यह ज्योतिष विधि श्रेष्ठ मानी जाती है.इस विधि से प्रश्न पूछने के समय में उपस्थित ग्रहस्थिति (planetary positions) के आधार पर लग्न का निर्घारण किया जाता है.इस पद्धति में वैदिक ज्योतिष की तरह जटिल गणितीय विधि नहीं अपनाई जाती है.प्रश्न ज्योतिष से आप जो प्रश्न करते हैं उससे सम्बन्धित उत्तर आपको तुरंत मिल जाता है.इनमें विंशोत्तरी दशा (Vimshottari Dasha), अन्तर्दशा (Antaradasha), प्रत्यंर्दशा (Pratyantara Dasha) जैसे विषयों को शामिल नहीं किया गया है.
सामुद्रिक शास्त्र (Palmistry)
सामुद्रिक शास्त्र को आम भाषा में हस्तरेखा विज्ञान कहते हैं.इसमें हाथेली में मौजूद रेखाओं, ग्रहों के पर्वत (mounts in the hand), चिन्हों, शारीरिक संरचना, अंग लक्षण, हाथ पैर की बनावट सहित नाखूनों के आधार पर फल कथन किया जाता है.इस विधि से जिन्हें अपनी जन्म तिथि एवं जन्म समय का ज्ञान नहीं होता है वह भी अपना भविष्य फल जान सकते हैं.हस्त रेखा को हस्तरेखा से फल कथन करने वाले ईश्वर का लेख मानते है.
लाल किताब (Lal-Kitab/ Redbook astrology)
भविष्य कथन की एक पद्धति लाल किताब भी है.लाल किताब सरल और सटीक ज्योतिष पद्धति है.इसमें ग्रहों के फल और उनके उपायो का विशेष महत्व है.इस विधि में भावों को खाना (Spaces) का नाम दिया गया है.इसमें राशियां नहीं होती है बल्कि प्रत्येक खाने का अंक होता है.ग्रह किस खाने में बैठें इसके आधार पर फलकथन किया जाता है.इसमें शुभ ग्रहों की शुभता बढ़ाने के लिए और अशुभ ग्रहों के प्रभाव को कम करने के लिए बताये गये उपायों को टोटका नाम दिया गया है.भारत के पंजाब प्रांत में ज्योतिष की यह विधि काफी लोकप्रिय है और दिनानुदिन लाल किताब के टोटकों का प्रचलन बढ़ता चला जा रहा है.
अंक ज्योतिष (Numerology)
अंक ज्योतिष का प्रचलन भारत में तेजी से हो रहा है.पाश्चात्य देशों में यह पद्धति काफी प्रचलित और लोकप्रिय है.इस पद्धति में नामांक (Name number), मूलांक (Root Number) और भाग्यांक (Destiny Number) इन तीन अंकों का विशेष महत्व है.1 से 9 तक के मूलांक होते हैं.इस विधि में नामांक, मूलांक और भाग्यांक मेल नहीं खाते हों तो व्यक्ति के लिए शुभ नहीं माना जाता है.इस विधि में उपचार का तरीका यह है कि तीनों प्रमुख अंक एक हों अगर ऐसा नहीं है तो नाम में परिवर्तन कर ऐसा नाम रखना चाहिए जिससे तीनों एक हो जाएं.इस पद्धति में मूलांक और भाग्यांक जन्मतिथि के आधार पर निकाला जाता है जबकि नामांक अग्रेजी के आधार पर ज्ञात किया जाता है.
टैरो कार्ड (Tarot Cards)
इन दिनों टैरो कार्ड से भविष्यफल (astrology predictions) ज्ञात करने की पद्धति भी प्रचलन में है.इस पद्धति में ताश के पत्तों की तरह 78 कार्डस होते हैं.इनमें से 0 से 21 तक के 22 कार्ड प्रमुख होते हैं शेष 56 कार्ड साधारण कार्ड कहलाते हैं.इन कार्डस को ताश के पत्तों की तरह फेंट कर प्रश्न कर्ता से कार्ड चुनने के लिए कहा जाता है.चुने गये कार्डस के आधार पर फलकथन किया जाता है.
भविष्य जानने की अन्य विधियां
उपरोक्त विधियों के अलावे कई अन्य विधियां हैं जिनसे भविष्य को देखा जाता है.लोशु च्रक (Loshu Chakra), रामशलाका (Ram Shalaka), चीनी ज्योतिष (Chinese astrology), नंदी नाड़ी ज्योतिष (nandi nadi jyotisha), क्रिस्टल बॉल, भृगु संहिता (Bhrigu Samhita), रमल ज्योतिष (Ramala), और मेदनीय ज्योतिष.आप अपनी आस्था और विश्वास के आप अपनी आस्था और विश्वास के अनुसार किसी भी पद्धति द्वारा भविष्य में झांक सकते हैं.




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Comments (10 posted):
28/11/1986
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